बेहतर पशुपालक उत्पादकता के लिए कपिला का प्रोएक्टिव सोच पर जोर

“हमने देखा है कि गर्मियों के दौरान होने वाली अधिकांश उत्पादकता हानि अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। समस्या यह है कि हस्तक्षेप अक्सर बहुत देर से होता है। ‘तैय्यारी का मौसम’ के जरिए हम पशुपालकों को आगे सोचने और समय रहते कदम उठाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं, क्योंकि असली फर्क वहीं से आता है,” कहा तरु शिवहरे, CMO और डायरेक्टर, कपिला पशु आहार ने।

भारत के समग्र इकोसिस्टम में उत्पादकता का सीधा संबंध मौसमी चक्रों से है, जहां गर्मी का मौसम अक्सर पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर सामने आता है। बढ़ता तापमान पशुओं में हीट स्ट्रेस, चारे की कम खपत और अंततः उत्पादन में गिरावट का कारण बनता है। वर्षों से इन चुनौतियों का सामना मुख्यतः रिएक्टिव तरीके से किया जाता रहा है यानी समस्या के प्रभाव दिखने के बाद ही कदम उठाए जाते हैं।

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कपिला पशु आहार अपने चल रहे अभियान ‘तैय्यारी का मौसम’ के जरिए इस सोच को बदलने की दिशा में काम कर रहा है। यह अभियान समय रहते तैयारी के महत्व पर जोर देता है और इसे गर्मियों के दौरान निरंतर उत्पादकता बनाए रखने का एक प्रमुख आधार मानता है।

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