स्क्रैप पॉलिसी से ऑटो इंडस्ट्री में हड़कंप! कबाड़ नियमों के कारण डूबेगी 25 हजार करोड़ की कमाई?

स्क्रैपेज पॉलिसी से वाहन कंपनियों को बड़ा नुकसान हो सकता है। हालांकि, इस पर अभी तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है।

स्क्रैप पॉलिसी के कारण भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को वित्त वर्ष 2025-26 के शुद्ध लाभ में लगभग 25,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण (उपयोग समाप्त हो चुके वाहन) नियमावली 2025 के तहत वाहन विनिर्माताओं को अतीत में बेचे गए वाहनों के लिए पर्यावरण मुआवजे हेतु बजटीय प्रावधान करना होगा। उद्योग के अधिकारियों के अनुसार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जनवरी 2025 में अधिसूचित पर्यावरण संरक्षण (उपयोग समाप्त हो चुके वाहन) नियमावली, 2025 में एक साधारण दिखने वाले उपबंध ने वाहन विनिर्माताओं को उस समय डरा दिया, जब उनके ऑडिटरों ने इसके परिणामों की गंभीरता की ओर इशारा किया।

Scrap Policy

स्क्रैप पॉलिसी

पर्याप्त वित्तीय प्रावधान करने होंगे

जनवरी 2025 की अधिसूचना के अनुसार, नियम 4 (6) कहता है कि अगर विनिर्माता अपना परिचालन बंद कर देता है, तो विनिर्माता को परिचालन बंद होने तक बाजार में पहले से उपलब्ध कराए गए वाहनों के संबंध में अपनी विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) का पालन करना होगा। एक उद्योग कार्यकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह नियम लेखा मानक ’इंड एएस AS 37- प्रावधान, आकस्मिक देनदारियां और आकस्मिक संपत्ति’ को सक्रिय करता है, जिसका अर्थ है कि वाहन विनिर्माताओं को पिछले 20 वर्षों में बेचे गए निजी वाहनों और 15 वर्षों में बेचे गए वाणिज्यिक वाहनों के लिए ईपीआर प्रमाणपत्रों की लागत हेतु पर्याप्त वित्तीय प्रावधान करने होंगे।

End of Feed