भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से मिल रहे समर्थन और सब्सिडी का दौर आने वाले वर्षों में खत्म हो सकता है। भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने वाहन कंपनियों को इसके लिए अभी से तैयार रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अगले चार-पांच वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के सामने कई नई चुनौतियां आने वाली हैं और कंपनियों को सरकारी मदद के बिना आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करनी होगी।
चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने पर जोर/Photo-AI
PTI/भाषा के मुताबिक रिजवी ने बृहस्पतिवार को वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम (SIAM) के वार्षिक सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार के समर्थन से भारत इलेक्ट्रिक परिवहन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन आने वाले समय में कंपनियों को अपने दम पर विकास की रफ्तार बनाए रखनी होगी।
इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 50 फीसदी
कामरान रिजवी ने बताया कि भारत में कुल तिपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत पहुंच चुकी है। यह 2026 के लिए तय 10 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ज्यादा है। उनके मुताबिक, अगले दो-तीन वर्षों में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
वहीं, कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 7 प्रतिशत है। कारों के मामले में यह आंकड़ा लगभग 4-5 प्रतिशत है। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों के बाजार में भी बड़ी संभावनाएं बताईं और कहा कि फिलहाल इनकी मांग और आपूर्ति के बीच काफी अंतर है।
चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने पर जोर
भारी उद्योग सचिव ने वाहन कंपनियों से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। उन्होंने कहा कि EV को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए सिर्फ वाहन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देशभर में मजबूत चार्जिंग नेटवर्क भी जरूरी है।
रिजवी ने बताया कि मंत्रालय ने 60 उच्च प्राथमिकता वाले कॉरिडोर में विद्युतीकरण के लिए 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सरकार की कोशिश है कि अगले दो-तीन वर्षों में प्रमुख राजमार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो जाए।
R&D पर खर्च बढ़ाने की सलाह
उन्होंने वाहन और ऑटो पार्ट्स कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर ज्यादा निवेश करने की सलाह दी। उनके मुताबिक, मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियां अगर रिसर्च पर अधिक खर्च करेंगी तो नई तकनीक विकसित करने और उसे बाजार में लाने का समय कम किया जा सकेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने भी कहा कि भविष्य में ईंधन और अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और ऑटो इंडस्ट्री को मिलकर काम करना होगा।
