भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के लिए बैटरी की मांग वर्ष 2032 तक करीब 10 गुना बढ़कर 200 गीगावाट-घंटा हो जाने का अनुमान है जबकि 2025 में यह 20 गीगावाट-घंटा थी। उद्योग निकाय इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। आईईएसए ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भारत में ईवी के लिए अवसर अब केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि असली बढ़त कलपुर्जों के स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति शृंखला के विकास में है। इससे भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होने में मदद मिल सकती है।
भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।(फोटो क्रेडिट-iStock)
India Energy Storage Alliance (IESA) भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर पर एक खास रिपोर्ट जारी करने जा रहा है। यह रिपोर्ट कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) के सहयोग से तैयार की गई है और इसे 8 से 10 जुलाई के बीच नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 12वें भारत ऊर्जा भंडारण सप्ताह के दौरान पेश किया जाएगा।
तेजी से बढ़ रहा EV उद्योग
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का EV उद्योग अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। शुरुआत में यह सेक्टर केवल सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन पर निर्भर था, लेकिन अब यह एक बड़े औद्योगिक नेटवर्क का रूप ले चुका है। इसमें बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और नई तकनीकों के कारण यह उद्योग आने वाले समय में और तेजी से विस्तार कर सकता है।
आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा कि ईवी बाजार तेजी से बढ़ रहा है और 2032 तक बैटरी मांग में 10 गुना उछाल आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि आगे की वृद्धि स्थानीय निर्माण, नई बैटरी प्रौद्योगिकी और मजबूत आपूर्ति शृंखला पर निर्भर करेगी।
बिक्री ने पार किया बड़ा आंकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री ने बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। इस दौरान देशभर में 25 लाख से ज्यादा EV बेचे गए, जिनमें करीब 15 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन और लगभग 7 लाख तिपहिया वाहन शामिल रहे। अध्ययन में बताया गया है कि फिलहाल भारतीय EV बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक जैसे दोपहिया वाहनों की है, क्योंकि ये आम लोगों के लिए ज्यादा किफायती और सुविधाजनक हैं। वहीं, तिपहिया ईवी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी सेवाओं में।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों और हल्के कमर्शियल वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। इससे भारत का EV सेक्टर और मजबूत होगा और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
(इनपुट-भाषा)
