2032 तक भारत में EV बैटरी की मांग 10 गुना होने का अनुमान: IESA

शुरुआत में यह सेक्टर मुख्य रूप से सरकारी नीतियों और योजनाओं के सहारे आगे बढ़ रहा था, लेकिन अब यह एक बड़े औद्योगिक सिस्टम का रूप ले चुका है। इस उद्योग में अब बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र भी तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे EV सेक्टर लगातार मजबूत बनता जा रहा है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के लिए बैटरी की मांग वर्ष 2032 तक करीब 10 गुना बढ़कर 200 गीगावाट-घंटा हो जाने का अनुमान है जबकि 2025 में यह 20 गीगावाट-घंटा थी। उद्योग निकाय इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। आईईएसए ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भारत में ईवी के लिए अवसर अब केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि असली बढ़त कलपुर्जों के स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति शृंखला के विकास में है। इससे भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होने में मदद मिल सकती है।

EV Batteries

भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।(फोटो क्रेडिट-iStock)

India Energy Storage Alliance (IESA) भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर पर एक खास रिपोर्ट जारी करने जा रहा है। यह रिपोर्ट कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) के सहयोग से तैयार की गई है और इसे 8 से 10 जुलाई के बीच नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 12वें भारत ऊर्जा भंडारण सप्ताह के दौरान पेश किया जाएगा।

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