CNG kit In Car: देश में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच नई कार खरीदने की जगह पर पुरानी कार में CNG फिट करवाना अच्छा विकल्प हो सकता है। CNG किट लगवाने के बाद आपको किन दो जरूरी काम को कर लेना चाहिए उसके बारे में जानते हैं। CNG सेफ्टी के लिहाज से भी अच्छी होती है और इससे हवा भी दूषित नहीं होती है। CNG गैस अगर लीक हो जाए है तो काफी तेजी से हवा में मिल जाती है। CNG कारों का माइलेज पेट्रोल-डीजल के मुकाबले 50% तक बढ़ जाता है।
CNG kit In Car: यदि आप बाहर से CNG किट लगवा रहे हैं तो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और इंश्योरेंस पॉलिसी में सीएनजी किट जरूर दर्ज करा लें।
बीमा पॉलिसी में सीएनजी किट करें मेंशन
यदि आप बाहर से CNG किट लगवा रहे हैं तो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और इंश्योरेंस पॉलिसी में सीएनजी किट जरूर दर्ज करा लें। ऐसा नहीं करने पर एक्सीडेंट होने की स्थिति में मुश्किल और बढ़ सकती है। कंपनी क्लेम देने से मना कर सकती हैं। इसलिए किट लगवाने के बाद RC और बीमा पॉलिसी में सीएनजी किट को जरूरी दर्ज करवाएं। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए नजदीकी RTO ऑफिस में जानकारी देना होता है। किसी भी वाहन को खरीदने पर परिवहन विभाग की ओर से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। जिसमें वाहन से जुड़ी सभी जानकारी होती है।
क्लेम में 25% तक हो सकती है कटौती
CNG किट की डिटेल्स रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर है, लेकिन इंश्योरेंस पॉलिसी में जिक्र नहीं है तो ऐसे में एक्सीडेंट होने पर क्लेम के लिए इंश्योरेंस कंपनियां मना सकती है। क्लेम होगा भी तो सेटल्ड और नॉन स्टैंडर्ड बेसिस पर होगा। कंपनी क्लेम की कुल रकम का 25 फीसदी तक कटौती कर सकती है। इसलिए इंश्योरेंस के समय CNG किट को इंश्योरेंस में जुड़वा लें।
कट सकता है चालान
यदि CNG किट की जानकारी न रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और पॉलिसी में दर्ज नहीं है तो ऐसी स्थिति में एक्सीडेंट होने पर इंश्योरेंस कंपनियां किसी भी तरह का क्लेम देने से मना कर सकती हैं। इसके अलावा बाहर से CNG लगवाकर बिना रजिस्ट्रेशन में दर्ज किए बिना कार चलाना गैरकानूनी माना जाता है। इसके लिए चालान देना पड़ सकता है।
