मुख्य न्यायाधीश बोले- 'इंस्टैंट नूडल्स की तरह लोग अब तुरंत न्याय की उम्मीद करते हैं लेकिन यह सही नहीं है'

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 23, 2022, 05:03 PM IST

मद्रास उच्च न्यायालय के नौ-मंजिले प्रशासनिक खंड की आधारशिला रखने के बाद अपने सम्बोधन में न्यायमूर्ति रमण ने यह भी कहा कि तमिल देश के सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों के संरक्षण में हमेशा अग्रणी रहे हैं।

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नई दिल्ली:  एक कार्यक्रम में  भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एन. वी.रमण ने कहा, "न्याय करना कोई आसान काम नहीं है। न्यायाधीशों को सामाजिक वास्तविकताओं से अवगत होना चाहिए। हमें बदलती सामाजिक जरूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान से देखना होगा। दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। हम जीवन के हर क्षेत्र में इस बदलाव को देख रहे हैं। 5 दिवसीय टेस्ट मैच से हम 20-20 प्रारूप में चले गए हैं। हम 3 घंटे की लंबी फिल्म की तुलना में कम अवधि के मनोरंजन को प्राथमिकता देते हैं। फिल्टर कॉफी से, हम इंस्टेंट कॉफी की ओर बढ़ गए हैं। इंस्टेंट नूडल्स के इस युग में, लोग तत्काल न्याय की उम्मीद करते हैं। लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि अगर हम तत्काल न्याय के लिए प्रयास करते हैं तो वास्तविक न्याय एक हताहत होगा। '

मुख्य न्यायाधीश बोले- 'इंस्टैंट नूडल्स की तरह लोग अब तुरंत न्याय की उम्मीद करते हैं लेकिन यह सही नहीं है'

भारत के प्रधान न्यायाधीश एन. वी.रमण ने शनिवार को कहा कि देश के संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानीय (क्षेत्रीय) भाषाओं के इस्तेमाल के संबंध में 'कुछ अवरोध' हैं। हालांकि, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित विभिन्न वैज्ञानिक नवाचारों की मदद से यह मुद्दा 'निकट भविष्य' में सुलझ जाएगा।

उच्च न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल को लेकर न्यायमूर्ति रमण की यह टिप्णी उस वक्त आयी जब कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल भाषा के इस्तेमाल की अनुमति देने का सीजेआई से आग्रह किया।प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में संविधान के अनुच्छेद 348 के तहत उच्च न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल की मांग होती रहती है। इस विषय पर व्यापक बहस हो चुकी है। कुछ व्यवधान हैं, जिसके कारण उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा रही है। मैं आश्वस्त हूं कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में नवाचार के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तरक्की के बल पर निकट भविष्य में उच्च न्यायालयों में (क्षेत्रीय) भाषाओं के इस्तेमाल से संबंधित कुछ मुद्दे सुलझ जाएंगे।'

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