बेमौसम बारिश वरदान? 'आपदा' को अवसर बना सकते हैं किसान; हरी खाद के लिए बेस्ट है ये फसल

बेमौसम बारिश (मई-जून) के बीच किसानों के लिए खासी फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर, सिंचाई की सुविधा है तो खाली खेत में अप्रैल से जून के बीच कभी भी सनई, ढैंचा, मूंग, उड़द आदि बो सकते हैं, जो हरी खाद के कारगर विकल्प हैं। इनमें से ढैंचा एवं सनई हरी खाद के लिहाज से सर्वाधिक उपयुक्त हैं।

बेमौसम बारिश से हो रही क्षति की भरपाई के लिए किसान मौजूदा नमी का लाभ लेते हुए ढैंचे की फसल ले सकते हैं। इसका लाभ उन्हें रबी की आगामी फसलों में बढ़ी हुई उपज के रूप में मिलेगा। कृषि विभाग भी किसानों को मंडलीय खरीफ गोष्ठियों में इस बाबत लगातार जागरूक कर रहा है। विभाग के बीज विक्रय केंद्रों पर 50 फीसदी अनुदान पर इसका बीज भी उपलब्ध है।उल्लेखनीय है कि ढैंचे की हरी खाद भूमि के लिए संजीवनी जैसी है। पिछले दो दशकों के दौरान किसान हरी खाद (ढैंचा, सनई, उड़द एवं मूंग) की उपयोगिता को लेकर जागरूक हुए हैं। लिहाजा इनके बीजों की मांग भी बढ़ी है। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भी भूमि में कार्बनिक तत्वों को बढ़ाने के लिए हरी खाद को प्रोत्साहित कर रही है। इन सबमें हरी खाद के लिहाज से सबसे उपयोगी ढैंचा ही है। यही वजह है कि सरकार खरीफ के सीजन में प्रदेश के किसानों को 50 फीसद अनुदान पर ढैंचा बीज उपलब्ध कराती है।

Unseasonal Rain 2025

कृषि (फोटो)

विक्रय केंद्र से मिलेगा अनुदान

खरीफ सीजन 2025-2026 में सरकार ने इसकी कीमत 11,685 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की है। किसानों को कृषि विभाग के बीज विक्रय केंद्र से यह अनुदान पर मिलेगा। मालूम हो कि खरीफ सीजन 2023-2024 में इसकी कीमत 6,300 रुपए प्रति क्विंटल थी। किसानों को इस पर 50 फीसदी अनुदान देय था। उस समय कृषि विभाग बीज के विक्रय केंद्र से किसानों को पूरे दाम देकर बीज खरीदना पड़ता था। अनुदान की रकम डीबीटी के जरिए बाद में किसान को भेजी जाती थी। इससे किसानों को होने वाली दिक्कतों के मद्देनजर सरकार ने पिछले साल इस व्यवस्था में बदलाव किया। कीमत पर देय अनुदान पर ही बीज बेचा गया। कीमत थी 9,000 रुपए प्रति क्विंटल। किसानों को यह 4,500 रुपए की दर से पड़ी थी।

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