Sugar Production : देश में चीनी उत्पादन के मोर्चे पर एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। चालू मार्केटिंग वर्ष (2026-27) में देश के भीतर चीनी का उत्पादन काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग संगठन 'भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ' (ISMA/इस्मा) के अनुसार, इस नए सत्र में अब तक देश का कुल चीनी उत्पादन 4 गुना बढ़कर 12.85 लाख टन तक पहुंच गया है। उद्योग एक्सपर्ट्स और ISMA का मानना है कि उत्पादन में हुई इस जबरदस्त बढ़ोतरी की मुख्य वजह इस बार गन्ने की पेराई का काम समय से पहले शुरू होना है। चीनी मिलों के जल्दी चालू होने से बाजार में नई चीनी की आवक भी तेजी से शुरू हो गई है।
गन्ने की समय से पहले पेराई से चीनी उत्पादन में उछाल
मिलों के समय से चालू होने का दिखा बड़ा असर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक ISMA द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 5 नवंबर 2026 तक देश भर की करीब 184 चीनी मिलों में पेराई का काम पूरी तरह शुरू हो चुका है। अगर इसकी तुलना पिछले साल की इसी अवधि से करें, तो पिछले साल इस तारीख तक केवल 154 मिलों में ही पेराई का काम शुरू हो पाया था। चालू सत्र में अब तक हुए 12.85 लाख टन चीनी उत्पादन के मुकाबले पिछले साल इसी समय तक देश में केवल 3.20 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हो सका था। देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में मिलों के एक के बाद एक चालू होने से उत्पादन के आंकड़ों में यह बड़ा सुधार देखने को मिला है।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की क्या है स्थिति?
चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे चल रहा है, जहां पेराई का काम सबसे पहले और तेजी से शुरू हुआ। महाराष्ट्र में 5 नवंबर तक 136 चीनी मिलें चालू हो चुकी थीं, जिनसे कुल 10.78 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। पिछले साल इस अवधि तक वहां 101 मिलें चालू थीं और उत्पादन महज 1.23 लाख टन ही हुआ था। वहीं, देश के दूसरे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य इलाकों की 19 मिलों में पेराई शुरू हो गई है, जिन्होंने अब तक 0.20 लाख टन चीनी बनाई है। उम्मीद जताई जा रही है कि पश्चिमी यूपी की बाकी मिलें अगले कुछ दिनों में और मध्य यूपी की मिलें दिवाली के तुरंत बाद चालू हो जाएंगी।
घरेलू जरुरतों के लिए बाजार में पर्याप्त चीनी
देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर ISMA ने आम लोगों और बाजार को बड़ी राहत दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी का कहना है कि भारत घरेलू चीनी की जरूरतों को आसानी से और बेहतर तरीके से पूरा करने की मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि पिछले सत्र का करीब 36 लाख टन चीनी का स्टॉक पहले से ही बचा हुआ था और अब नए सत्र में भी उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में देश के पास आम उपभोक्ताओं और औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उद्योग संगठन का यह भी कहना है कि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रहें और आपूर्ति बनी रहे, इसके लिए सभी मिलें और विनिर्माता पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
