Organic Compost : आजकल बाजार में मिलने वाली खाद और उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में घर पर ही जैविक खाद तैयार करना एक अच्छा और सस्ता विकल्प बन सकता है। खास बात यह है कि यह खाद बनाने के लिए किसी महंगे सामान की जरुरत नहीं होती, बल्कि घर के रोजाना निकलने वाले गीले कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। गार्डनिंग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह खाद पौधों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसे कई लोग ‘काला सोना’ भी कहते हैं, क्योंकि यह मिट्टी की ताकत बढ़ाने में बहुत मददगार होती है।
महंगी खाद का सस्ता और आसान विकल्प
क्या है ‘काला सोना’?
‘काला सोना’ दरअसल एक तरह की जैविक खाद है, जो पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार की जाती है। इसमें किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं होता। यही वजह है कि यह मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है। कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक यह खाद पौधों की ग्रोथ को तेज करती है और फलदार पौधों में ज्यादा फल आने में मदद करती है। आजकल शहरों में बालकनी गार्डनिंग और किचन गार्डन का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में घर के कचरे से खाद बनाना (Kitchen waste compost) लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
किन चीजों से बनती है यह खाद?
इस जैविक खाद को बनाने के लिए घर में निकलने वाले गीले कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सब्जियों के छिलके, फलों के छिलके, चाय की पत्तियां और अंडे के छिलके शामिल किए जा सकते हैं। ये सभी चीजें आसानी से सड़कर पोषक तत्वों में बदल जाती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि प्याज, लहसुन और खट्टे फलों यानी सिट्रस के छिलकों को इसमें शामिल न करें। इसकी वजह यह है कि ये जल्दी नहीं गलते और खाद बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
ऐसे तैयार करें घर पर खाद
घर में खाद बनाना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले एक पुराना गमला, बाल्टी या प्लास्टिक का ड्रम लें। उसमें नीचे और किनारों पर छोटे-छोटे छेद कर दें, ताकि हवा आती-जाती रहे। इसके बाद सबसे नीचे सूखी पत्तियों, पुराने अखबार या कागज की एक परत बिछा दें। अब इसके ऊपर घर का गीला कचरा डालें। हर परत के बीच थोड़ी-थोड़ी मिट्टी डालते रहें। ऐसा करने से कचरा जल्दी सड़ता है और खाद जल्दी तैयार होती है। ध्यान रखें कि मिश्रण में नमी बनी रहनी चाहिए। अगर यह ज्यादा सूखा लगे तो हल्का पानी छिड़क सकते हैं। इसके साथ ही समय-समय पर इस मिश्रण को हिलाना भी जरूरी है, ताकि उसमें हवा बनी रहे और सड़ने की प्रक्रिया सही तरीके से चलती रहे।
25 से 30 दिनों में तैयार हो जाएगी खाद
अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो यह खाद करीब 25 से 30 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है। जब इसका रंग गहरा काला हो जाए और मिट्टी जैसी खुशबू आने लगे, तो समझिए कि आपका ‘काला सोना’ तैयार है। इसके बाद इसे गमलों, बगीचे या खेत की मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है और उनकी बढ़त तेजी से होती है।
पौधों के लिए फायदेमंद, पर्यावरण के लिए भी अच्छा
यह जैविक खाद पौधों को मजबूत बनाती है, उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है और फल-फूल ज्यादा देने में मदद करती है। खासकर फलदार पौधों में इसका असर जल्दी देखने को मिलता है। इतना ही नहीं, घर के कचरे से खाद बनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे कचरा कम होता है और गीले कचरे का सही इस्तेमाल हो पाता है। यानी एक तरफ पैसों की बचत होती है और दूसरी तरफ प्रकृति को भी फायदा मिलता है। यही वजह है कि आज के समय में यह तरीका हर घर के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, अगर आपको जैविक खाद बनाना है तो कृषि एक्सपर्ट से संपर्क करें।)
