Solar Panel Model : केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को एक ऐसे मॉडल पर विचार करने का सुझाव दिया, जिसमें फसलों के ऊपर ऊंचे सौर पैनल लगाए जाएं। इस मॉडल से किसान न केवल भोजन का उत्पादन करेंगे, बल्कि ऊर्जा के भी प्रदाता बन सकेंगे।
किसानों के लिए सरकार का बड़ा प्लान
राष्ट्रीय कृषि-रिन्युअल एनर्जी सम्मेलन-2025 में लिया हिस्सा
मंत्री ने यह बात भारतीय राष्ट्रीय सौर ऊर्जा महासंघ (एनएसईएफआई) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कृषि-नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन-2025 में कही। उन्होंने इस अवसर पर महासंघ की रिपोर्ट और कृषि एवं नवीकरणीय ऊर्जा पर वार्षिक संदर्भ पुस्तक का भी विमोचन किया।
रिन्युअल एनर्जी और कृषि का समन्वय बढ़ाने का उद्देश्य
सरकारी बयान के अनुसार, इस सम्मेलन का आयोजन नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और किसानों के बीच संवाद व सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, ताकि कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का प्रभावी समावेशन हो सके।
पीएम-कुसुम योजना से ऊर्जा सुरक्षा का प्रयास
मंत्री ने कहा कि किसानों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए सौर पैनल एक प्रमुख स्रोत बन सकते हैं। पीएम-कुसुम योजना इसी दिशा में काम कर रही है और किसानों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
ऊंचे सौर पैनल लगाने का मॉडल किसानों को ऊर्जा-खाद्य प्रदाता बनाएगा
चौहान ने खेतों में फसल उगाने के लिए ऊंचे सौर पैनल लगाने का मॉडल प्रस्तावित किया, जो छोटे और मध्यम स्तर के किसानों को खाद्य और ऊर्जा दोनों के प्रदाता में बदल सकता है। उन्होंने इस मॉडल को विकसित करने और गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
सरकार मॉडल के कार्यान्वयन का करेगी समर्थन
मंत्री ने कहा कि यदि इस मॉडल के प्रभावी और आधुनिक संस्करण सामने आते हैं, तो सरकार इसके कार्यान्वयन का समर्थन अवश्य करेगी।
किसानों की समृद्धि के लिए छह महत्वपूर्ण उपाय
चौहान ने किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए छह उपाय बताए:-
- उत्पादन बढ़ाना
- उत्पादन लागत कम करना
- उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना
- नुकसान की स्थिति में मुआवजा देना
- विविधीकरण को बढ़ावा देना
- भूमि संरक्षण के लिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग
जैविक खेती और मिट्टी की उर्वरता पर जोर
मंत्री ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक खेती के महत्व को भी रेखांकित किया।
कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
चौहान ने बताया कि वर्ष 2014-15 से कृषि उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें गेहूं, चावल, मक्का और मूंगफली के उत्पादन में खासा इजाफा हुआ है। उन्होंने दालों और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़
मंत्री ने कहा कि भारत कृषि के बिना काम नहीं कर सकता है।” उन्होंने बताया कि देश की आधी आबादी अभी भी रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर है। बदलते समय के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाना आवश्यक है।
