Fertilizer Subsidy : केंद्र सरकार ने मंगलवार को किसानों को राहत देते हुए चालू 2025-26 रबी सत्र के लिए फॉस्फोरस और पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों पर 37,952 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस साल रबी सत्र के लिए स्वीकृत सब्सिडी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14,000 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को समय पर सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्रिमंडल ने 2025 रबी सत्र में पीएंडके उर्वरक पर 37,952 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी (तस्वीर-istock)
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नई सब्सिडी दरें 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो गई हैं। पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत तय की गई दरों के अनुसार, नाइट्रोजन (एन) के लिए ₹43.02 प्रति किलोग्राम, फॉस्फोरस (पी) के लिए ₹47.96 प्रति किलोग्राम, पोटाश (के) के लिए ₹2.38 प्रति किलोग्राम और सल्फर (एस) के लिए ₹2.87 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दी जाएगी।
मंत्री ने बताया कि सब्सिडी दरें तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के आयात मूल्य, पोषक तत्वों की घरेलू आवश्यकता, सब्सिडी के कुल वित्तीय बोझ, तथा उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा गया है।
केंद्र की एनबीएस योजना के तहत सरकार प्रत्येक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर पर प्रति किलोग्राम एक निश्चित सब्सिडी दर घोषित करती है। इसके बाद कंपनियों को किसानों को निर्धारित एमआरपी पर उर्वरक बेचने की अनुमति होती है, जबकि सब्सिडी का अंतर सरकार वहन करती है।
इस निर्णय से देश के करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि रबी मौसम में गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई के दौरान उर्वरकों की मांग चरम पर होती है। वर्तमान में देश के कई हिस्सों में रबी फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों और लॉजिस्टिक लागत के बावजूद सरकार ने सब्सिडी राशि बढ़ाकर किसानों पर महंगाई का बोझ कम करने की कोशिश की है। इस कदम से कृषि उत्पादन में स्थिरता बनी रहेगी और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का यह निर्णय आने वाले महीनों में किसानों की उत्पादन लागत घटाने और रबी फसलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
