Kisan ki Khabar : केंद्र सरकार ने पीली मटर (Yellow Peas) के आयात पर 1 नवंबर 2025 से 30 प्रतिशत ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 प्रतिशत मानक आयात शुल्क और 20 प्रतिशत कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC) लगाया जाएगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक राजस्व विभाग की लेटेस्ट अधिसूचना के अनुसार अगर बिल ऑफ लैडिंग 1 नवंबर या उसके बाद जारी किया जाता है, तो नया शुल्क लागू होगा।
सरकार ने पीली मटर के आयात पर 30% शुल्क लगाया, पुराने बिल पर छूट जारी (तस्वीर-istock)
हालांकि, इस फैसले में एक राहत की बात यह है कि 31 अक्टूबर 2025 या उससे पहले जारी बिल वाले आयातकों को शून्य शुल्क पर आयात की सुविधा अभी भी मिलेगी। इसका मतलब है कि पुराने अनुबंधों के तहत आयात की गई मटर पर कोई अतिरिक्त ड्यूटी नहीं लगेगा। यह कदम व्यापारियों और आयातकों के लिए एक संक्रमण अवधि प्रदान करने की दिशा में उठाया गया है।
सरकार ने पहले मई 2025 में यह घोषणा की थी कि पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात मार्च 2026 तक जारी रहेगा। तब से यह उम्मीद थी कि आयातकों को कुछ समय तक राहत मिलेगी, जिससे उनकी लागत और बाजार मूल्य स्थिर रह सके। हालांकि अब 1 नवंबर से लागू नया शुल्क आयातकों के लिए महंगी पड़ सकता है और बाजार में मटर की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। पीली मटर भारत में एक महत्वपूर्ण आयातित दाल है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार का कहना है कि आयात पर शुल्क लगाने से स्थानीय किसानों को फायदा होगा और देश में कृषि उपज को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं व्यापारियों का कहना है कि अचानक शुल्क बढ़ने से उन्हें लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। आयातक यूनियन ने पहले ही सुझाव दिया है कि सरकार को एक व्यवस्थित योजना के तहत टैरिफ में बदलाव करना चाहिए, ताकि व्यापार और बाजार पर अचानक असर न पड़े।
राजस्व विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए शुल्क के साथ आयातकों को 10 प्रतिशत मानक शुल्क और 20 प्रतिशत एआईडीसी अलग से देना होगा। इसका मतलब यह है कि कुल शुल्क 30 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह नीति न केवल आयात की लागत बढ़ाएगी बल्कि घरेलू बाजार में मटर की कीमतों पर भी असर डाल सकती है।
इस प्रकार 1 नवंबर 2025 के बाद पीली मटर के आयात पर नई नीति लागू होगी, जबकि पुराने बिल वाले आयातकों को संक्रमण अवधि में राहत दी गई है। व्यापारियों और किसानों के लिए यह समय योजना बनाने और अपनी रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण चरण होगा।
