Nursery business : किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर नर्सरी की ओर बढ़ रहे हैं। नर्सरी बिजनेस में किसान सब्जियों और फलों के पौधे तैयार करते हैं और साल भर इन्हें बाजार में बेचकर अच्छी आय कमाते हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि वे खेती के पुराने तरीकों से अलग होकर नए रास्ते अपना रहे हैं। बिहार के किसान काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। किसान लीची, मखाना, सिंघारा और लौकी की खेती में भारत में बिहार नंबर वन है।
नर्सरी बिजनेस से चमकी बिहार के किसानों की दुनिया (तस्वीर-istock)
नर्सरी बिजनेस से सब्जियों की उत्पादन में बढ़ोतरी
हिंदी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सीतामढ़ी के उद्यान वैज्ञानिकों का कहना है कि सही तरीके से नर्सरी तैयार करने से किसान साल भर सब्जियों के पौधे उगा सकते हैं। टमाटर, फूलगोभी, शिमला मिर्च जैसे कई सब्जियों के पौध तैयार करके किसान बाजार में बेच रहे हैं। इससे उन्हें फसलों की तुलना में ज्यादा लाभ मिल रहा है। पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी आधुनिक तकनीकें अपनाने से पौधों की गुणवत्ता अच्छी हो रही है और समय से पहले पौध बाजार में बेचकर किसानों की आमदनी बढ़ रही है।
फलों की नर्सरी से भी हो रही कमाई
केवल सब्जियों तक ही सीमित नहीं, बल्कि सीतामढ़ी के किसान फलों के पौधे भी तैयार कर रहे हैं। आम, अमरूद, लीची, नींबू, और पपीता जैसे फलों के कलमी पौधे उगाकर वे लाखों रुपये कमा रहे हैं। कई युवा किसान नर्सरी व्यवसाय में उतरकर नई मिसाल कायम कर रहे हैं। वे पारंपरिक खेती छोड़कर नर्सरी व्यवसाय में नए तरीके अपना रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी दोगुनी हो रही है। आइए जानते किन-किन फसलों के उत्पादन में बिहार देश में पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें नंबर पर है। The Indian Index के मुताबिक नीचे लिस्ट देखिए।
भारत में इन फसलों के उत्पादन में बिहार का स्थान
देश में बिहार का पहला स्थान
| फसलों के नाम | देश भर में उत्पादन में स्थान |
| लीची | देश में बिहार का पहला स्थान |
| मखाना | देश में बिहार का पहला स्थान |
| मशरूम | देश में बिहार का पहला स्थान |
| सिंघाड़ा | देश में बिहार का पहला स्थान |
| लौकी | देश में बिहार का पहला स्थान |
| जूट और मेस्ता | देश में बिहार का दूसरा स्थान |
| आलू | देश में बिहार का तीसरा स्थान |
| मसूर | देश में बिहार का तीसरा स्थान |
| मिर्च (हरी) | देश में बिहार का तीसरा स्थान |
| भिंडी | देश में बिहार का तीसरा स्थान |
| फूलगोभी | देश में बिहार का तीसरा स्थान |
| आम | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| प्याज | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| मूली | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| पत्तागोभी | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| गाजर | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| बैंगन | देश में बिहार का चौथा स्थान |
| सूरजमुखी | देश में बिहार का 5वां स्थान |
| गन्ना | देश में बिहार का 5वां स्थान |
| मक्का | देश में बिहार का 5वां स्थान |
सरकारी योजनाओं से किसानों को मदद
हिंदी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक पशु चिकित्सा एवं पशुपालन वैज्ञानिक डॉ कींकर कुमार और कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ पिनाकी रॉय बताते हैं कि सरकार नर्सरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को पाली हाउस, ग्रीन हाउस बनाने और बीज संरक्षण इकाई स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जा रहा है। अगर किसान इन योजनाओं का लाभ उठाएं और आधुनिक तकनीक अपनाएं तो सीतामढ़ी जिले में नर्सरी उत्पादन एक उदाहरण बन सकता है।
आसान तकनीक, ज्यादा लाभ
नर्सरी व्यवसाय कम लागत में शुरू किया जा सकता है और इससे ज्यादा लाभ मिलता है। किसान पौध तैयार करके समय से पहले बाजार में बेचते हैं, जिससे उनकी आमदनी में तेजी से बढ़ोतरी होती है। नर्सरी से पौध उगाकर किसान जल्दी फसल प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
किसान नर्सरी प्रबंधन को अपनाकर अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। सही तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से यह व्यवसाय कम निवेश में ज्यादा लाभ देने वाला साबित हो रहा है। नर्सरी व्यवसाय से किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं और खेती के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। यह व्यवसाय किसानों के लिए स्थायी और लाभकारी साबित हो रहा है।
