Kesar Ki Kheti : अब केसर की खेती केवल कश्मीर जैसे ठंडे इलाकों तक सीमित नहीं रहेगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों ने कृषि जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे नियंत्रित वातावरण में कहीं भी केसर की खेती की जा सकेगी। इस तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने 9 जनवरी 2026 को पेटेंट प्रदान किया है। राज्य के कृषि विभाग ने इसे एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि बताया है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय की नई तकनीक से देशभर में संभव होगा केसर उत्पादन (तस्वीर-istock)
क्या है नई पेटेंट तकनीक
इस इनोवेशन का नाम है “ए ग्रोथ मीडिया कंपोजीशन फॉर रैपिड इन-विट्रो डायरेक्ट ऑर्गेनोजेनेसिस ऑफ सैफ्रन”। आसान भाषा में कहें तो यह तकनीक प्रयोगशाला (लैब) में केसर के पौधों के अंगों को तेजी से विकसित करने से जुड़ी है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक खास पोषक माध्यम (न्यूट्रिएंट मीडिया) तैयार किया है, जिसकी मदद से कम समय में बड़ी संख्या में केसर के पौधे तैयार किए जा सकते हैं। ये पौधे रोगमुक्त, एक जैसे गुणों वाले और उच्च गुणवत्ता के होते हैं।
केसर: महंगा लेकिन सीमित फसल
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने बताया कि केसर दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है। अब तक इसकी खेती मुख्य रूप से कश्मीर और कुछ चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों तक ही सीमित रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह जलवायु और तापमान की विशेष जरूरतें हैं। खुले खेतों में बिहार जैसे राज्यों की जलवायु में केसर उगाना कठिन माना जाता रहा है।
नियंत्रित वातावरण में संभव खेती
डॉ. सिंह ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और आधुनिक तकनीकों के कारण अब स्थिति बदल रही है। नियंत्रित तापमान, नमी और संरक्षित वातावरण जैसे पॉलीहाउस, नेट हाउस और आधुनिक उद्यानिकी प्रणालियों में केसर की खेती पूरी तरह संभव है। इन-विट्रो तकनीक से तैयार स्वस्थ पौधों का उपयोग कर किसान सुरक्षित तरीके से केसर उत्पादन कर सकते हैं।
किसानों और स्टार्टअप के लिए नए अवसर
इस तकनीक से प्रगतिशील किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए नए अवसर खुलेंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय से जुड़ा एक स्टार्टअप पहले से ही इस तकनीक के व्यावसायीकरण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। भविष्य में यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी।
बिहार सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस उपलब्धि को बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कृषि अनुसंधान और इनोवेशन के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह पेटेंट विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक क्षमता, निरंतर शोध और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का मजबूत प्रमाण है।
कृषि को मिलेगी नई दिशा
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि केसर जैसी अत्यंत मूल्यवान फसल के लिए विकसित यह उन्नत इन-विट्रो तकनीक भविष्य में किसानों की आमदनी बढ़ाने, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और बिहार की कृषि को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे राज्य के किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नई और लाभकारी खेती की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय की यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आई है। आने वाले समय में यह तकनीक केसर को आम किसानों की पहुंच में लाने और भारत को केसर उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मदद कर सकती है।
