World Turtle Day: विश्व कछुआ दिवस के मौके पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने राज्य में चल रहे कछुआ संरक्षण अभियान (Assam turtle conservation) की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि असम भारत में कछुओं की विविधता का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। देश में पाई जाने वाली 31 कछुआ प्रजातियों में से 21 प्रजातियां केवल असम में मिलती हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि कछुए दुनिया के सबसे ज्यादा खतरे में पड़े जीवों में शामिल हैं और इनके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है।
विश्व कछुआ दिवस पर असम सरकार का बड़ा अभियान (तस्वीर-X)
दुनिया भर में बढ़ रहा है कछुओं पर खतरा
मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए वीडियो में बताया गया कि दुनिया में कछुओं की कुल 369 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें प्राकृतिक आवास का नष्ट होना, जलाशयों का खत्म होना, पर्यावरण प्रदूषण और लोगों में जागरूकता की कमी प्रमुख हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जंगलों की कटाई के कारण कछुओं के रहने और प्रजनन करने की जगह लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर प्रयास बेहद जरूरी हो गए हैं।
मंदिरों के तालाब बने कछुओं के सुरक्षित आश्रय
असम में मंदिरों के तालाब कछुओं के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वीडियो में बताया गया कि राज्य के विभिन्न मंदिर तालाबों में करीब 16 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। ये तालाब अब कछुओं के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। असम वन विभाग, स्टेट CAMPA असम और असम स्टेट जू मिलकर इन तालाबों में कछुओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर रहे हैं। तालाबों में breeding यानी प्रजनन और basking यानी धूप सेंकने के लिए विशेष स्थान बनाए जा रहे हैं ताकि कछुओं की संख्या बढ़ सके और उनका जीवन सुरक्षित रह सके।
लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
सरकार केवल संरक्षण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। वन विभाग स्थानीय लोगों और मंदिर समितियों को कछुओं के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगर लोग कछुओं के महत्व को समझेंगे तो इनके संरक्षण में समाज की भागीदारी भी बढ़ेगी। कई स्थानों पर जागरूकता अभियान, प्रदर्शनियां और शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों और युवाओं में वन्यजीव संरक्षण के प्रति रुचि बढ़े।
जैव विविधता संरक्षण में असम की अहम भूमिका
एक्सपर्ट्स का मानना है कि असम की समृद्ध जैव विविधता पूरे देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां की नदियां, जंगल और जलाशय कई दुर्लभ जीवों का घर हैं। कछुए पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जल स्रोतों को साफ रखने और प्राकृतिक खाद्य सीरीज को संतुलित करने में मदद करते हैं। ऐसे में उनका संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का काम नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है।
संरक्षण के लिए मिलकर काम करने की जरुरत
विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर असम सरकार का यह संदेश साफ है कि प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा के लिए सरकार और समाज दोनों को साथ मिलकर काम करना होगा। अगर समय रहते कछुओं और अन्य जीवों के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में कई दुर्लभ प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं। असम में चल रहे ये प्रयास देश के दूसरे राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकते हैं।
