यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) की नॉर्वे यात्रा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। जेलेंस्की की मोल्दोवा से नॉर्वे जाने वाली फ्लाइट बुधवार (स्थानीय समय) को ड्रोन घुसपैठ के कारण देर से रवाना हुई। ड्रोन क्रैश के कारण मोल्दोवा ने मंगलवार को सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस कुछ समय के लिए बंद कर दिया था। इससे जेलेंस्की की फ्लाइट समेत तीन उड़ानें प्रभावित हुई।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (File Photo)
ड्रोन क्रैश से खेत में लगी आग
मोल्दोवा की पुलिस के अनुसार, मंगलवार को देश के रिस्कानी (Riscani) जिले के एक गांव के बाहर सूरजमुखी के खेत में एक रूसी ड्रोन क्रैश हो गया, जिससे चार जगहों पर आग लग गई। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह ड्रोन राजधानी चिशिनाउ के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 160 किलोमीटर दूर गिरा, जिसके बाद उसमें विस्फोट हो गया।
मोल्दोवा के सरकारी प्रवक्ता दुमित्री चियोरिसी ने बुधवार को बताया कि उस समय देश के ऊपर से गुजरने वाले विमानों की सुरक्षा के लिए मंगलवार दोपहर को एयरस्पेस बंद कर दिया गया था। इस वजह से तीन उड़ानों में देरी हुई, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को ले जाने वाली फ्लाइट भी शामिल थी। स्थिति सामान्य होने और प्रतिबंध हटने के बाद जेलेंस्की की फ्लाइट तय समय से देरी से रवाना हुई।
रोमानिया तक पहुंचा था ड्रोन
अधिकारियों ने बताया कि यह ड्रोन पहले रोमानिया के एयरस्पेस में दाखिल हुआ था। रोमानिया NATO का सदस्य है। रोमानियाई मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन की निगरानी के लिए स्पेन की एयर एंड स्पेस फोर्स के दो F-18 फाइटर विमानों को हवा में भेजा गया था। इसके बाद ड्रोन दोबारा मोल्दोवा के एयरस्पेस में प्रवेश कर गया।
गेरान-टाइप ड्रोन के मिले अवशेष
मोल्दोवा की पुलिस और विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि घटनास्थल पर ड्रोन के टुकड़े मिले हैं, जिसमें एक प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य विशेषताएं थीं, जो 'गेरान-टाइप' (Geran-type) ड्रोन से मिलती-जुलती हैं। रूस इस तरह के ड्रोनों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बड़े पैमाने पर कर रहा है। पुलिस का कहना है कि धमाके के बाद वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है और विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि इसमें किस प्रकार और कितनी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। बता दें कि यूक्रेन की सीमा रोमानिया और मोल्दोवा दोनों देशों से लगती है, और 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से दोनों देश इस तरह की कई ड्रोन घटनाओं की रिपोर्ट कर चुके हैं।
