पाकिस्तान 1948 से 2022 के कालखंड में तीन बार भारत से सीधी लड़ाई लड़ा और नतीजा क्या रहा दुनिया जानती है। यहां पर 1971 की लड़ाई की एक तस्वीर जारी हुई जिसमें पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल अमीर अब्दुल खान नियाजी भारतीय फौज के सामने सरेंडर करते दिखाया गया है। खास बात यह है कि यह तस्वीर भारत नहीं बल्कि तालिबान की तरफ से जारी की गई और पाकिस्तान के हुक्मरानों को चुनौती भी दी गई है। अहमद यासीर ने तालिबान पर पाकिस्तानी हमले को लेकर चेताया है और कहा कि पाकिस्तान के गृहमंत्री, लाजवाब सर, अफगानिस्तान, सीरिया और पाकिस्तान तुर्की नहीं हैं जो सीरिया में कुर्द को निशाना बना रहे हैं। यह अफगानिस्तान है जो बड़े बड़े साम्राज्यों का कब्रगाह है। हमारे ऊपर किसी सैन्य हमले के बारे में ना सोचें, नतीजा शर्मनाक होगा जो आपका भारत के साथ हुआ था।
1971 की लड़ाई में पाकिस्तान ने किया था सरेंडर
पाकिस्तान की हुई थी करारी हार
बता दें कि 1971 की भारत के साथ लड़ाई के बाद पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को सरेंडर करना पड़ा था और दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सरेंडर था। इस लड़ाई के बाद बांग्लादेश नाम के स्वतंत्र देश का उदय हुआ। 1971 की लड़ाई की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी जिसमें इंडियन एयरफोर्स के बेस को निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद भारत की तरफ से थल, जल, नभ के जरिए पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर भारतीय फौज ने सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।
د پاکستان داخله وزیر ته !عالي جنابه! افغانستان سوريه او پاکستان ترکیه نده چې کردان په سوریه کې په نښه کړي.دا افغا… t.co/wamJpd58iL
— ANI (@ANI) Jan 2, 2023
भारतीय फौज की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों को ढाका में सरेंडर करना पड़ा था। बता दें कि अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार को सत्ता से तालिबान ने बेदखल किया था तो पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क था जिसने तालिबानी सत्ता को सराहा। पाकिस्तान को ऐसा लग रहा था कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने का अर्थ होगा कि उससे रणनीतिक तौर पर फायदा मिलेगा। हालांकि पाकिस्तान में आतंकवाद और तालिबान के साथ झड़प के बाद दोनों के बीच संबंधों में तनाव आया है।
