Strait of Hormuz Toll: दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर सर्विस फीस लगाने की ईरान की योजना ने वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजारों में हलचल तेज कर दी है। ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में युद्ध समाप्ति के लिए हुए 60 दिनों के अस्थायी समझौते (जिसके तहत फिलहाल जहाजों की आवाजाही मुफ्त है) के बाद तेहरान अब इस जलमार्ग पर स्थाई रूप से शुल्क वसूलने की तैयारी में है।
क्या भारत को देना होगा 'होर्मुज टैक्स'? जहाजों पर सर्विस चार्ज लगाने की तैयारी के बीच ईरान ने दिल्ली को दिया बड़ा भरोसा (AP)
इस घोषणा के बाद भारतीय व्यापारिक जगत में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया था कि क्या भारतीय जहाजों और तेल टैंकरों को भी इस प्रस्तावित शुल्क का भुगतान करना होगा? हालांकि, तेहरान से आ रहे आधिकारिक कूटनीतिक संकेत बताते हैं कि संकट के समय ईरान का साथ निभाने वाले भारत को इस टैक्स से बड़ी राहत (Special Treatment) मिल सकती है।
बीजिंग में ईरान ने साफ की अपनी नई नीति
बीजिंग में आयोजित 'वर्ल्ड पीस फोरम' (World Peace Forum) में बोलते हुए, चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली ने ओमान के साथ मिलकर बनाए जा रहे इस नए फ्रेमवर्क की पुष्टि की है।
यह टोल टैक्स नहीं, सर्विस चार्ज है: ईरानी राजदूत ने स्पष्ट किया, 'चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक बड़ा हिस्सा हमारे क्षेत्रीय जलक्षेत्र (Territorial Waters) में आता है, इसलिए हम निश्चित रूप से जहाजों पर सर्विस फीस लागू करेंगे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन भले ही इसका विरोध करे, लेकिन इसे किसी 'अनिवार्य टोल या टैक्स' के बजाय समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन निगरानी और भारी जहाजों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से निपटने के एवज में लिया जाने वाला 'सर्विस चार्ज' माना जाना चाहिए।
संकट के साथियों को मिलेगी विशेष छूट: राजदूत फजली ने चीन और भारत जैसे सहयोगी देशों की ओर इशारा करते हुए एक बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा, 'हम निश्चित रूप से उन देशों के लिए विशेष नीति (Special Considerations) पर विचार करेंगे जो हमारे प्रति मित्रवत रहे हैं और जिन्होंने विशेष रूप से हमारे कठिन समय में हमारा मजबूती से साथ दिया है।'
भारत को पहले भी मिल चुका है 'सुरक्षित मार्ग' का आश्वासन
यद्यपि ईरान ने अभी तक देशवार अधिकारिक शुल्क संरचना (Fee Structure) की घोषणा नहीं की है, लेकिन नई दिल्ली को पूर्व में मिले आश्वासन बताते हैं कि भारत पर इसका वित्तीय असर नहीं पड़ेगा।
इससे पहले भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने स्पष्ट किया था कि हालिया क्षेत्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय टैंकरों को ईरान को कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा है।
भारतीय राजदूत मोहम्मद फथाली का पिछला बयान, 'आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई चार्ज लिया है? इस मुश्किल समय में भी हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के हित और भविष्य एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं। भारत ने हमेशा खुद को एक संवेदनशील और विश्वसनीय भागीदार साबित किया है।'
राजदूत फथाली ने भारतीय जहाजों को भविष्य में भी इस रणनीतिक जलमार्ग से बिना किसी रुकावट के गुजरने का भरोसा देते हुए कहा था, 'भारतीय जहाजों को भविष्य में भी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) मिलता रहेगा।'
दुनिया और भारत के लिए क्यों जीवन रेखा है 'होर्मुज'?
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा चोकपॉइंट (Chokepoint) है:
20% कच्चे तेल की आवाजाही: दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।
भारत की निर्भरता: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल) का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई) से इसी रास्ते के जरिए आयात करता है। ऐसे में ईरान द्वारा नियमों या शुल्कों में किया जाने वाला कोई भी बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
अमेरिकी विरोध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद, ईरान और ओमान इस मार्ग को संयुक्त रूप से संचालित करने के लिए नया मैकेनिज्म तैयार कर रहे हैं, जिसमें भारत के लिए रियायतें तय होना लगभग तय माना जा रहा है।
