India Russia Relations: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने भारत को बड़ा रक्षा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने रूस के पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई 57 (Sukhoi Su-57) की पेशकश करते हुए संकेत दिया है कि भविष्य में दोनों देश मिलकर इसका संयुक्त उत्पादन भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रूस इस परियोजना में भारत के साथ बिना किसी प्रतिबंध के काम करने के लिए तैयार है।
सुखोई। (फोटो- विकीपीडिया)
गुरुवार रात को पुतिन ने विभिन्न समाचार एजेंसियों से बात करते हुए भारत-रूस रक्षा सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि रूस पहले भी भारत को एसयू-57 कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव दे चुका है और अब भी हम नई दिल्ली के साथ इस दिशा में काम करने को इच्छुक है।
पुतिन बोले- हमने दिया था प्रस्ताव
पुतिन ने कहा कि जहां तक एसयू-57 की बात है,हमने भारत में अपने दोस्तों को इस पांचवीं पीढ़ी के विमान को संयुक्त रूप से विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे अच्छा विमान है। लेकिन हमारे भारतीय दोस्तों ने कहा,'देखते हैं'। उन्होंने आगे कहा कि सैद्धांतिक रूप से, यह हमारा (रूस-भारत का) उत्पाद हो सकता था। हमने इसे स्वतंत्र रूप से बनाया है। और हम भारत के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। रूसी राष्ट्रपति ने आगे स्पष्ट किया कि एसयू-57 के विकास और उत्पादन में भारत के साथ सहयोग को लेकर रूस की ओर से किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होगा। उन्होंने कहा कि रूस संयुक्त विकास,तकनीकी सहयोग और उत्पादन के लिए पूरी तरह तैयार है।
पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश में भारत
गौरतलब है कि भारत बीते कई सालों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश में है। इसी उद्देश्य से देश ने अपनी महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैक्ट एयरक्राफ्ट (Advanced Multirole Combat Aircraft,AMCA) परियोजना शुरू की है। इसे भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम माना जाता है। हालांकि एएमसीए के तहत विकसित विमान 2035 से पहले भारतीय वायुसेना में शामिल होने की संभावना नहीं है। ऐसे में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर भारत द्वारा सीमित संख्या में एसयू-57 खरीदने की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है।
सूत्रों का कहना है कि सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटिडे (Hindustan Aeronautics Limited) और सुखोई डिजाइन ब्यूरो के बीच संभावित सहयोग को लेकर संपर्क बना हुआ है। अगर कोई समझौता होता है तो भारत में इन विमानों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है।
भारत स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली "सुदर्शन चक्र" विकसित कर रहा है और रूसी मूल की एस-400 मिसाइल प्रणाली इसके प्रमुख घटकों में से एक होने वाली है।
2018 में भारत ने किया था रूस के साथ डील
भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच इकाइयां खरीदने के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा किया। यह सौदा अमेरिका की उस चेतावनी के बावजूद किया गया कि अनुबंध को आगे बढ़ाने से ’काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के प्रावधानों के तहत प्रतिबंध लग सकते हैं। एस-400 की पांचवीं स्क्वाड्रन की आपूर्ति अभी होनी है। ’ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एस-400 ने अहम भूमिका निभाई थी। मार्च में,भारत ने रूस से पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों के एक नए जत्थे की खरीद को मंजूरी दी,जिससे इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी।
