US Iran War: अमेरिका-ईरान के बीच फिलहाल संघर्षविराम है, लेकिन यह शांति कितनी लंबी चलेगी, यह कोई नहीं जानता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दोनों देशों के बीच ठनी हुई है। फिलहाल मिडिल ईस्ट दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। एक तरफ वो देश हैं, जो अमेरिका-इजरायल के साथ खड़े हैं। वहीं, एक तरफ वो देश हैं, जो ईरान के साथ हैं।
इजरायल ने यूएई को आयरन बीम दिया है। AP
इसी बीच इजरायल ने अपना लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम, आयरन डोम, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और सैनिकों का एक दस्ता संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तैनात किया। इजरायल का उद्देश्य ईरान की ओर से बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूएई की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पहली बार इजरायल ने किसी मुस्लिम देश की मदद की
सबसे बड़ी बात है कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि इजरायल किसी मुस्लिम देश में खुले तौर पर पहली बार सामने आया है, जब इजरायल ने किसी मुस्लिम देश में अपने रक्षा हथियारों के साथ सैनिकों को भी उतारा हो।
ईरान ने यूएई पर किए ताबड़तोड़ हमले
ईरान की तरफ से लगातार हो रहे हवाई हमलों के खतरे को देखते हुए, इजरायल ने अपने अत्याधुनिक रक्षा सिस्टम यूएई को उपलब्ध कराए। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलें और बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल थे, जिनसे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली। बताते चलें कि लेजर हथियार ही नहीं, इजरायल ने स्पेक्ट्रो नामक एक एडवांस निगरानी प्लेटफॉर्म भी यूएई में भेजा है। यह सिस्टम लगभग 20 किलोमीटर की दूरी से ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है।
इजरायल ने तैनाती में नहीं की देरी
गौरतलब है कि यूएई को भेजे गए कई सिस्टम अभी प्रोटोटाइप स्टेज में थे, मतलब है कि वे पूरी तरह विकसित या इजरायल की नियमित सैन्य संरचना में शामिल नहीं थे, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते खतरे के कारण इजरायल ने जो उपलब्ध था उसे तुरंत तैनात कर दिया।
