US Canada Trade War: कनाडा ने 700 से ज्यादा अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 8 सितंबर से लागू होंगे। ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) के बढ़ने से अमेरिकी एक्सपोर्टर्स, बिजनेस और ग्राहकों पर असर पड़ सकता है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि कनाडा के नए टैरिफ 15% से 50% के बीच होंगे और इनका मकसद अमेरिकी टैरिफ के बराबर (डॉलर-के-बदले-डॉलर) टैरिफ लगाना है। ओटावा अमेरिकी स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ को दोगुना करके 50% कर रहा है, ताकि वाशिंगटन द्वारा कनाडाई स्टील और एल्युमीनियम पर पहले से लगाए गए टैरिफ के बराबर हो सके।
टैरिफ तो बस शुरुआत है...ट्रेड वॉर में अमेरिका को 'जहां सबसे ज्यादा दर्द हो' वहां कैसे चोट पहुंचा सकता है कनाडा?
इन उपायों में स्टील, एल्युमीनियम, कागज के सामान, कंस्ट्रक्शन मटीरियल, घरेलू उपकरण, डेयरी उत्पाद और सीफूड जैसे उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने कहा कि अमेरिका के हालिया टैरिफ का 'पूरे देश में कनाडाई कर्मचारियों, बिजनेस और समुदायों पर असल असर पड़ेगा।' शैंपेन ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कनाडा को जवाब देना ही होगा, और आज हम एक उचित, लक्षित और रणनीतिक तरीके से ऐसा कर रहे हैं।'
लेकिन टैरिफ कनाडा के जवाब का सिर्फ पहला चरण हो सकता है। अगर ट्रेड वॉर और बढ़ता है, तो ओटावा बिजली, ऊर्जा, पोटाश और दूसरे जरूरी एक्सपोर्ट से जुड़े उपाय अपना सकता है, ऐसे कदम जिनका अमेरिकी बिजनेस और घरों पर ज्यादा सीधा असर पड़ सकता है।
अमेरिकी बिजनेस के लिए कनाडा के टैरिफ क्यों मायने रखते हैं?
कनाडा अमेरिकी सामानों के लिए दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, जिससे यह कई तरह के अमेरिकी उद्योगों के लिए एक अहम ग्राहक बन जाता है।
अमेरिकी ट्रेड डेटा के अनुसार, कनाडा के हालिया जवाबी टैरिफ में उन सामानों का लगभग 6% हिस्सा शामिल है जो अमेरिका इस देश को एक्सपोर्ट करता है। इसकी तुलना में, अमेरिका के हालिया टैरिफ में उन सामानों का लगभग 5% हिस्सा शामिल है जो अमेरिका ने पिछले साल कनाडा से इम्पोर्ट किए थे।
इसका मतलब है कि अमेरिकी कंपनियों के लिए तुरंत खतरा साफ है: कनाडाई टैरिफ कनाडा में अमेरिकी उत्पादों को महंगा बना देते हैं, जिससे मांग कम हो सकती है।
घरेलू उपकरण इसका एक उदाहरण हैं। कनाडा पिछले साल अमेरिकी घरेलू उपकरणों के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट था, जिसने 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के ऐसे सामान खरीदे थे। इनमें से ज्यादातर उत्पादों पर अब 25% कनाडाई टैरिफ लगेगा।
अगर कनाडाई ग्राहक और बिजनेस घरेलू उत्पादों या दूसरे विकल्पों की ओर रुख करते हैं, तो अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स अपने सबसे अहम विदेशी बाजारों में से एक में बिक्री खो सकते हैं।
कैपिटल इकोनॉमिक्स में नॉर्थ अमेरिका के इकोनॉमिस्ट ब्रैडली सॉन्डर्स ने कहा कि ऐसा लगता है कि कनाडा ने ऐसे कई उत्पाद चुने हैं जिनके लिए घरेलू विकल्प पहले से ही उपलब्ध हैं। सॉन्डर्स ने CNN को बताया, 'इनमें से ज्यादातर सामान इसलिए चुने गए हैं क्योंकि इनके घरेलू विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचाया जा सके और साथ ही कनाडाई उपभोक्ताओं और उद्योग पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।'
कनाडा में मांग में लगातार कमी आने से उन अमेरिकी कंपनियों के उत्पादन, काम के घंटों और रोजगार पर दबाव पड़ सकता है जो कनाडा को निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। कनाडा ने नए टैरिफ से प्रभावित घरेलू व्यवसायों की मदद के लिए CAD 7.5 बिलियन (लगभग $5.4 बिलियन) के पैकेज की भी घोषणा की है।
कनाडा-अमेरिका के बीच बिगड़ते संबंध
ओटावा खास अमेरिकी सामानों को क्यों निशाना बना रहा है?
कनाडा की जवाबी कार्रवाई सिर्फ व्यापार की मात्रा को ध्यान में रखकर नहीं की जा रही है। कनाडा की उद्योग मंत्री मेलानी जॉली ने संकेत दिया कि ओटावा उन उत्पादों की राजनीतिक भौगोलिक स्थिति पर भी विचार कर रहा है जिन्हें वह अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले निशाना बना रहा है।
जॉली ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, 'हम ऐसे उत्पादों को भी निशाना बना रहे हैं जो अमेरिका के राज्यों को प्रभावित करेंगे। इसलिए हम राजनीतिक दबाव बनाने के लिए समझदारी और रणनीति से काम ले रहे हैं, और इसीलिए हमें लगता है कि अभी ऐसा करना सही है।'
क्या ट्रेड वॉर टैरिफ से आगे बढ़ सकता है?
यहीं पर अमेरिकियों पर असर ज्यादा सीधा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही 1 जनवरी से कनाडाई कारों और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ दोगुना करके 50% करने की धमकी दी है। रिश्ते बिगड़ने के साथ ही उन्होंने कनाडा के खिलाफ अपनी बयानबाजी भी तेज कर दी है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में कहा, 'मैं कई देशों के साथ काम करता हूं, और कनाडा निश्चित रूप से सबसे मुश्किल और गैर-वाजिब देश है।'
जब CNN ने उनसे कनाडा के उन दावों के बारे में पूछा कि वॉशिंगटन ने बातचीत के आखिरी दौर में अतिरिक्त मांगें रखी थीं, तो ट्रंप ने जवाब दिया, 'यह तो बिल्कुल मेरे जैसा लगता है।' उन्होंने आगे कहा, 'उन्हें उचित रकम चुकानी होगी। और अगर वे उचित रकम नहीं चुकाते हैं, तो हम कोई डील नहीं करेंगे। कोई बात नहीं।'
अगर वॉशिंगटन ऑटो टैरिफ बढ़ाता है या व्यापार पर और पाबंदियां लगाता है, तो कनाडा के पास इंपोर्ट ड्यूटी के अलावा दूसरे उपाय भी मौजूद हैं।
कनाडा-अमेरिका संबंधों पर पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की पूर्व विशेष सलाहकार और पॉलिसी स्ट्रैटेजिस्ट डायमंड आइसिंगर ने CNN को बताया कि ओटावा ऊर्जा और पोटाश (खाद का एक मुख्य घटक) के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने पर विचार कर सकता है। ऐसे कदमों का असर सामान्य टैरिफ की तुलना में अमेरिका पर अलग तरह से पड़ेगा।
कनाडाई टैरिफ मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों के लिए कनाडा में सामान बेचना मुश्किल बनाते हैं। हालांकि, कनाडाई एक्सपोर्ट पर पाबंदियों से अमेरिका के अंदर इस्तेमाल होने वाले उत्पाद और कच्चा माल महंगा हो सकता है या उन्हें हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
क्या कनाडा बिजली का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है?
बिजली उन उपायों में से एक है जिनका जिक्र कनाडाई अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से किया है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने सोमवार को एसोसिएटेड प्रेस द्वारा प्रकाशित एक इंटरव्यू में कहा कि अगर व्यापार विवाद और बिगड़ता है, तो कनाडा को अमेरिका को बिजली का एक्सपोर्ट रोकने के लिए तैयार रहना चाहिए।
ओंटारियो न्यूयॉर्क, मिशिगन और मिनेसोटा सहित अमेरिका के कई राज्यों को बिजली सप्लाई करता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी कड़े कदम उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया और सोमवार को पत्रकारों से कहा कि 'किसी भी विकल्प को खारिज नहीं किया जा सकता।' बिजली के जरिए जवाबी कार्रवाई का अमेरिकियों पर क्या असर हो सकता है, इसका एक उदाहरण पहले से ही मौजूद है।
ओंटारियो ने पिछले साल अमेरिका को बिजली एक्सपोर्ट पर कुछ समय के लिए 25% सरचार्ज लगाया था। उस समय ओंटारियो सरकार का अनुमान था कि इस कदम से 15 लाख अमेरिकी घरों पर असर पड़ेगा और 'जब तक सरचार्ज लागू रहेगा, तब तक हर दिन' 4,00,000 कनाडाई डॉलर (लगभग 2,80,000 अमेरिकी डॉलर) का खर्च आएगा। इसलिए, बड़े पैमाने पर चल रहे ट्रेड विवाद के दौरान ऐसा कोई कदम उन अमेरिकी राज्यों में बिजली की लागत पर और दबाव डाल सकता है जो कनाडा से बिजली लेते हैं।
ऊर्जा से जुड़ी पाबंदियों का अमेरिकियों पर ज्यादा बुरा असर क्यों पड़ सकता है?
समय के लिहाज से ऐसे कदम बहुत संवेदनशील हो सकते हैं। जुलाई के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में रहने का खर्च एक साल पहले के मुकाबले 3.4% ज्यादा था। गैस की कीमतें साल-दर-साल लगभग 25% बढ़ीं, जबकि बिजली और पाइप वाली गैस दोनों ही लगभग 4% महंगी हो गईं।
कनाडा से ऊर्जा या बिजली की सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट से दबाव और बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी परिवार पहले से ही जरूरी ऊर्जा के लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं।
कनाडा के जवाबी कदम से अमेरिका को कितना नुकसान हो सकता है?
फिलहाल, इसका तुरंत असर अमेरिकी एक्सपोर्टर्स पर पड़ने की संभावना है क्योंकि कनाडा के टैरिफ के कारण अमेरिकी सामान कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। बड़ा खतरा तब पैदा होगा जब विवाद टैरिफ से आगे बढ़ जाएगा। बिजली, ऊर्जा, पोटाश या कनाडा से एक्सपोर्ट होने वाली अन्य अहम चीजों पर पाबंदियों से अमेरिकी कारोबारों और ग्राहकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
फिलहाल, कनाडा ने कारों और ऑटो पार्ट्स पर ट्रंप की 50% टैरिफ की धमकी के खिलाफ तब तक कोई जवाबी कदम नहीं उठाया है जब तक कि वे लागू न हो जाएं। कनाडा की इंडस्ट्री मिनिस्टर जॉली ने कहा कि ओटावा पहले से कोई कदम नहीं उठाएगा, लेकिन यह साफ कर दिया कि अगर वॉशिंगटन ऐसा करता है तो कनाडा जवाब देगा।
