अमेरिका (US) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ‘टिप पर कोई कर नहीं’ (No Tax on Tips) नीति के एक साल पूरे होने पर हुए प्रचार अभियान को लेकर खुलकर बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति में कुछ ’’शर्मिंदगी भरी’’ चीजें ’’दिखावे के लिए करनी पड़ती’’ हैं, लेकिन उनका उद्देश्य लोगों को लाभ पहुंचाना होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओवल ऑफिस के बाहर अर्कांसस की डिलीवरी एजेंट शैरोन सिमंस के साथ (फोटो- AP)
ट्रंप ने क्यों उठाया अजीब कदम?
ट्रंप ने लास वेगास में आयोजित एक रैली के दौरान कहा कि राजनीति में प्रचार और संदेश देने के लिए कुछ प्रतीकात्मक कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने ‘ओवल ऑफिस’ में बर्गर मंगवाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम थोड़ा “अजीब” जरूर था, लेकिन इससे लोगों को नीति का फायदा समझाने में मदद मिली। दरअसल, ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी DoorDash की एक डिलीवरी ड्राइवर शैरोन सिमंस ने हाल ही में व्हाइट हाउस स्थित ‘ओवल ऑफिस’ में बर्गर और फ्राइज के दो बैग पहुंचाए थे। व्हाइट हाउस की ओर से दावा किया गया कि ‘टिप पर कोई कर नहीं’ नीति लागू होने के कारण सिमंस ने करीब 11,000 अमेरिकी डॉलर की बचत की। इस घटना को सरकार ने नीति की सफलता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
क्या था पूरा विवाद?
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाएं भी सामने आईं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि शैरोन सिमंस ने पिछले वर्ष जुलाई में अमेरिकी कांग्रेस के सामने इस नीति के समर्थन में गवाही दी थी और खुद को नेवादा की निवासी बताया था। बाद में वह अर्कांसस चली गईं और हाल ही में केवल एक दिन के लिए वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में डिलीवरी ड्राइवर के रूप में काम करती दिखाई दीं, जिससे इस घटना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
ट्रंप की प्रचार नीति
ट्रंप ने अपने 2024 के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान हुई अन्य घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने एक फास्ट-फूड आउटलेट में खुद ‘फ्राइज’ परोसे थे और सुरक्षा जैकेट पहनकर प्रचार अभियान के लोगो वाले कचरा ट्रक पर भी चढ़े थे। उनके मुताबिक, ये सभी कदम प्रचार रणनीति का हिस्सा थे, जिन्हें लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए अपनाया गया। DoorDash के प्रवक्ता जूलियन क्रॉली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि ओवल ऑफिस में बर्गर पहुंचाने की घटना ‘टिप पर कोई कर नहीं’ नीति के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम का हिस्सा थी। इसके बावजूद, यह मामला राजनीतिक प्रचार और वास्तविक लाभ के बीच की रेखा को लेकर नई बहस छेड़ गया है।
