Dhaka University: ढाका विश्वविद्यालय में पाकिस्तान के संस्थापक मो. अली जिन्ना और जमात-ए-इस्लामी के पूर्व मुखिया गुलाम आजम की तस्वीरें लगाए जाने पर सोमवार को बवाल हो गया। नाराज छात्रों ने दोनों की तस्वीरें फाड़कर वहां से हटा दीं। आरोप है कि कट्टरपंथी जमात की छात्र इकाई शिबिर ने दोनों नेताओं की तस्वीरें नए सिरे से बनकर तैयार हुए DUCSU संग्रहालय में लगाईं। छात्रों का कहना है कि तस्वीरों के जरिए संस्थान के ऐतिहासिक आधार को बदलने की कोशिश की गई। गुलाम आजम 1971 के युद्ध अपराधों के दोषी हैं।
ढाका यूनिवर्सिटी के म्यूजियम में लगाई गई थीं तस्वीरें।
पूछा-इस विलेन की तस्वीरें क्यों लगाई?
2025 में DUCSU के उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके मोहम्मद अबू तैयब ने संग्रहालय में लगे इन दोनों नेताओं की तस्वीरें फाड़ीं। बाद में बीएनपी के बांग्लादेश जातीयताबादी छात्र दल एवं बांग्लादेश के लेफ्ट धड़े का छात्र संगठन भी प्रदर्शन में शामिल हो गए। तैयब ने कहा कि 'हम 1971 अथवा भाषायी आंदोलन को भूले नहीं हैं।' तायब ने पूछा कि 'ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन (DUCSU) के संग्रहालय में इस विलेन की तस्वीरें क्यों लगाई गई हैं और क्या यूनियन के मेनिफेस्टो में 'जिन्ना को हीरो' बनाने का संकल्प लिया गया था?'
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होगी कार्रवाई-PRO
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वहां जिन्ना की तीन तस्वीरें लगी हुई थीं, लेकिन बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की कोई अलग तस्वीर नहीं थी। ढाका विश्वविद्यालय (DU) के PRO के उप निदेशक फर्रुख महमूद ने कहा, 'विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे लोगों की तस्वीरें प्रदर्शित करना, जिनके कार्य भाषा आंदोलन और बांग्लादेश की स्वतंत्रता के इतिहास से मेल नहीं खाते, पूरी तरह अस्वीकार्य है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।'
रिनोवेशन के बाद म्यूजियम को दोबारा खोला गया
दरअसल, DUCSU के म्यूजियम को रिनोवेशन के बाद बीते रविवार को दोबारा खोला गया था तो इसमें कई बदलाव नजर आए थे, लेकिन सबसे अहम थे। आर्काइव से बांग्लादेश की आजादी के नायक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को अकेले दिखाने वाली सारी तस्वीरें हटा दी गई थीं। म्यूजिम में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तीन तस्वीरें लगा दी गई थीं। यह बदलाव छात्र शिबिर की अगुवाई वाले ढाका यूनिवर्सिटी केंद्रीय छात्र संघ (DUCSU) ने किए थे।
