भारत से विदेशों में नौकरी की चाहत लिए घूम रहे नौजवानों के साथ एक अलग ही किस्म का धोखा हो रहा है। यहां से नौकरी के नाम पर युवकों को रूस ले जाया जा रहा है और वहां ले जाकर उन्हें यूक्रेन के साथ हो रही जंग में धकेल दिया जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर अलर्ट भी जारी किया है। साथ ही सीबीआई ऐसे एजेंटों को रडार पर ले रखी जो इस काम में लिप्त हैं।
रूसी सेना पर गोले बरसाते यूक्रेन के सैनिक
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विदेश मंत्रालय का एक्शन
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि रूसी सेना के साथ काम करने के लिए कई भारतीय नागरिकों के साथ धोखाधड़ी मामले को भारत ने रूस के समक्ष मजबूती से उठाया है ताकि उन लोगों की शीघ्र रिहाई हो सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि झूठे प्रलोभन और वादों पर भारतीयों को भर्ती करने वाले एजेंट और ऐसे कृत्यों में संलिप्त तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।
सीबीआई का एक्शन
वहीं सीबीआई ने एक ऐसे मानव तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो भारतीयों को यूक्रेन युद्धक्षेत्र में धकेलने का काम करता था और इस काम में शामिल रूस में रह रहे दो एजेंट के बारे में एजेंसी जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों ने बताया कि ये एजेंट रूस आने वाले भारतीयों का पासपोर्ट अपने पास कथित रूप से जमा कर लेते थे और उन्हें सशस्त्र बलों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया करते थे।
दो एजेंटों की पहचान
राजस्थान की रहने वाली क्रिस्टीना और मोइनुद्दीन छीपा रूस में हैं और दोनों ही भारतीय युवाओं को वहां लुभावनी नौकरियों का झांसा देकर तस्करी किया करते थे।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी की प्राथमिकी में भारत भर में फैली 17 अन्य वीजा कंसल्टेंसी कंपनियों, उनके मालिकों और एजेंटों को नामजद किया गया है। सीबीआई ने सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और मानव तस्करी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
कैसे फंसाते हैं जाल में
सीबीआई की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी व्यक्ति अपने एजेंटों के माध्यम से भारतीय नागरिकों को रूसी सेना, सुरक्षा गार्ड, सहायक, बेहतर जीवन और शिक्षा से संबंधित नौकरियां दिलाने के बहाने रूस में तस्करी किया करते थे। पीड़ितों से अवैध रूप से बड़ी रकम वसूला करते थे। जब ये भारतीय रूस पहुंचे तो वहां के एजेंटों ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और उन्हें लड़ाकू प्रशिक्षण के बाद सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। सीबीआई ने प्राथमिकी में बताया-"उन्हें (तस्करी कर रूस ले जाये गये भारतीय) लड़ाकू प्रशिक्षण के साथ-साथ रूसी सेना की वर्दी और बैच प्रदान किए गए। इसके बाद इन भारतीय नागरिकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में अग्रिम ठिकानों पर तैनात कर उनके जीवन को खतरे में डाल दिया गया।"
