दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंच गए। उनका 17 दिनों का तीन देशों का दौरा अमेरिका से शुरू हुआ है। इस दौरान वह अमेरिका के अलावा कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा करेंगे। न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर भारतीय मूल की महिलाओं ने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। मोहन भागवत का यह विदेश दौरा RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की कड़ी का हिस्सा है। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान भारत और विदेशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में भागवत भारतीय मूल के लोगों, स्थानीय संगठनों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
अमेरिका पहुंचे आरएसएस चीफ मोहन भागवत (फोटो-ANI)
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम
भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां संबोधन भी करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम की ओर से किया जा रहा है।
USCIRF की टिप्पणी से पहले ही विवाद
भागवत के अमेरिका पहुंचने से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS को लेकर टिप्पणी की थी। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्च स्तरीय राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनके साथ आधिकारिक बैठकों से बचने की अपील की थी। भारत ने USCIRF की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया और कहा कि वह लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है।
USCIRF ने मार्च में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी और RSS तथा RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। भारत सरकार ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए स्रोतों की विश्वसनीयता और भारत की स्थिति के एकतरफा चित्रण पर भी सवाल उठाए थे। अब भागवत के तीन देशों के दौरे को RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान विदेशों में संगठन और भारतीय मूल के समुदायों के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
