मीडिया पर हमला, प्रेस की आजादी पर प्रहार, ट्रंप से टकराव में US मीडिया एकजुट, भारत के लिए क्या है सबक?

मीडिया का काम सत्ता से असहज सवाल पूछना और सरकार की जवाबदेही तय करना है, न कि केवल सरकार के पक्ष में खबरें दिखाना। लेकिन ट्रंप को यह पसंद नहीं। वह चाहते हैं कि मीडिया वही दिखाए जैसा वह सोचते और देखते हैं। मीडिया के तल्ख सवाल उन्हें पसंद नहीं।

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। प्रेस लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से तो उठाता ही है, यह सत्ता और संस्थाओं की जवाबदेही भी तय करता है लेकिन जब इसी चौथे स्तंभ पर प्रहार होने लगे तो लोकतंत्र की आजादी खतरे में पड़ जाती है। प्रेस की आजादी पर यह हमला यदि दुनिया के सबसे 'पावरफुल' और विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र के मुखिया की तरफ से हो तो सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नहीं बल्कि तीन मीडिया संस्थानों CNN, MS NOW और POLITICO पर बैन लगा दिया। इन तीनों मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगा दी गई।

Trump media

ट्रंप प्रशासन ने तीन मीडिया संस्थानों पर लगाया है बैन।

ट्रंप चाहते हैं मीडिया वही दिखाए जैसा वह सोचते हैं!

मीडिया का काम सत्ता से असहज सवाल पूछना और सरकार की जवाबदेही तय करना है, न कि केवल सरकार के पक्ष में खबरें दिखाना। लेकिन ट्रंप को यह पसंद नहीं। वह चाहते हैं कि मीडिया वही दिखाए जैसा वह सोचते और देखते हैं। मीडिया के तल्ख सवाल उन्हें पसंद नहीं। जब किसी एक मीडिया संस्थान को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर पूरे पत्रकारिता तंत्र पर पड़ सकता है। अमेरिकी मीडिया की सामूहिक प्रतिक्रिया यह संदेश देती है कि प्रेस की स्वतंत्रता किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का साझा अधिकार है।

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