‘सेना के समर्थन से सत्ता पर कब्जा...’, इमरान खान के गढ़ में शहबाज-मुनीर ने क्यों लगाई इमरजेंसी?

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले पर विवाद बढ़ गया है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने इसे सेना के समर्थन से सत्ता पर कब्जे जैसा कदम बताते हुए हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग की है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू करने और गवर्नर शासन के फैसले को लेकर विवाद गहरा गया है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘सेना के समर्थन से सत्ता पर कब्जा’ करार दिया है। संगठन ने पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी समेत हिरासत में लिए गए सभी नेताओं की रिहाई और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग की है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी चेतावनी दी है कि आपातकाल के नाम पर मानवाधिकारों और असहमति की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।

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जानें इमरान खान के गढ़ में इमरजेंसी पर क्यों भड़के मानवाधिकार संगठन। AI IMAGE

मानवाधिकार संगठन ने क्या कहा?

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