2020 में बंद हुई कैलाश मानसरोवर की यात्रा 2025 में फिर से शुरू हुई थी, जो इस साल भी जारी है। इस साल चीन ने एक अलग पहल करते हुए भारतीय पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल को कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए आमंत्रित किया था। इस प्रतिनिधिमंडल को चीन ने अपने कब्जे वाले तिब्बत में भी घुमाया। इसी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे Times Now नवभारत के पत्रकार गौरव श्रीवास्तव। आइए देखते हैं गौरव श्रीवास्तव ने तिब्बत और कैलाश मानसरोवर की यात्रा में क्या-क्या देखा?
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए Times Now नवभारत के पत्रकार ने वहां क्या देखा
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग सुगम
यह यात्रा भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। कैलाश मानसरोवर की यात्रा का मार्ग अब पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित है। चीनी सरकार ने यात्रियों के लिए आधुनिक होटल, बेहतर मेडिकल सुविधाएं, ऑक्सीजन की व्यवस्था और सहायता के लिए वॉलंटियर्स तैनात किए हैं।
तिब्बत का विकास
तिब्बत के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिले। ल्हासा से लिंगची तक बुलेट ट्रेन की सुविधा, सड़कों का जाल, हवाई अड्डे का विस्तार और 99% बिजली का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा (हाइड्रो और विंड) से किया जा रहा है। चीनी आंकड़ों की मानें तो 1965 के बाद से तिब्बत की जीडीपी में भारी उछाल आया है। यहां प्रति व्यक्ति आय में 200 गुना वृद्धि हुई है, शिक्षा 15 साल तक मुफ्त है, और औसत जीवन प्रत्याशा 35 वर्ष से बढ़कर 72 वर्ष हो गई है। यहां चीनी अधिकारियों ने 'इकोलॉजिकल सिक्योरिटी बैरियर' का दावा किया है। यहां थांगका चित्रकला, ओपेरा और धार्मिक स्थलों (जैसे पोटाला पैलेस) को संरक्षित किया जा रहा है ताकि तिब्बती संस्कृति को जीवित रखा जा सके ।
पत्रकार की नजर में तिब्बत
इस यात्रा के दौरान गौरव श्रीवास्तव ने यह महसूस किया कि तिब्बत को लेकर जो एकतरफा या नकारात्मक तस्वीर अक्सर पेश की जाती है, वह हकीकत से मेल नहीं खाती। अपनी आंखों से देखे गए विकास और बेहतर जीवन स्तर के आधार पर, उन्होंने तिब्बत को एक उभरते हुए और विकसित क्षेत्र के रूप में वर्णित किया है। हालांकि, वे स्पष्ट करते हैं कि बतौर भारतीय, उनका स्टैंड तिब्बत को लेकर भारत सरकार की आधिकारिक नीति के अनुरूप ही है।
