Israel Iran War: अमेरिका ने कुछ दिनों पहले हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले से करीब 19 समुद्री मील दूर ईरानी युद्धपोत 'आरआरआईएस डेना' को टॉरपीडो से डुबो दिया था। इस हमले में 100 से ज्यादा ईरान नैसैनिक मारे गए, जबकि 32 नौसैनिकों को श्रीलंका ने जीवित बचा लिया। इन 32 नौसैनिकों का श्रीलंका के गाले में इलाज चल रहा है। गाले से देखिए टाइम्स नाउ नवभारत की ग्राउंड रिपोर्ट
ईरानी नौसैनिकों को लेकर ट्रंप ने श्रीलंका को दिया ऑर्डर। AI Generated/ AP
नौसैनिकों की भविष्य अमेरिका तय करेगा: ट्रंप प्रशासन
गाले में मौजूद टाइम्स नाउ नवभारत के रिपोर्ट इमरान खान ने ईरानी सैनिकों की हालात के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इन ईरानी सैनिकों का इलाज अस्पताल में जारी ही है, अब अमेरिका ने श्रीलंका पर दबाव बनाया है कि जिन 32 नैसैनिकों को श्रीलंका ने बचाया है उसे ईरान न भेजा जाए। उन सभी भी भविष्य सैनिकों की भविष्य को अमेरिका तय करेगा। हालांकि, श्रीलंका का साफ तौर पर कहना है कि वो बस कूटनीतिक तरीके से अपना काम कर रहा है। उसकी न तो अमेरिका से और न ही ईरान से कोई दुश्मनी है।श्रीलंका के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
गौरतलब है कि गुरुवार को श्रीलंका के एक अन्य नौसैनिक सहायक पोत 'आईआरआईएस बुशहर' से 208 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित उतारा गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि एक द्विपक्षीय देश होने के नाते इस चालक दल को शरण दी गई है।
'आईरिस लावन' को भारत ने क्यों दी शरण?
बताते चलें कि युद्ध की शुरुआत वाले दिन यानी 28 फरवरी को ईरान का जहाज 'आईरिस देना' अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में डूब गया था। इसी बीच 'आईरिस लावन' ने तकनीकी दिक्कतों की जानकारी देते हुए भारत के बंदरगाह पर आने की अनुमति मांगी।
विदेश मंत्री ने बताया कि यह अनुरोध 28 फरवरी के आसपास आया था और भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि पोर्ट में प्रवेश की अनुमति दे दी। कुछ दिनों की यात्रा के बाद जहाज वहां पहुंच गया। जहाज पर मौजूद 183 क्रू सदस्य फिलहाल कोच्चि स्थित नौसैनिक सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।
