'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने गुरुवार (स्थानीय समय) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम के नए प्रस्ताव को ठुकरा दिया। यह प्रस्ताव वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के जरिए भेजा गया था। इस मामले की जानकारी रखने वाले ईरानी और इराकी अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इराकी प्रधानमंत्री अल-जैदी और ट्रंप (फाइल फोटो)
नाम न बताने की शर्त पर NYT से बात करने वाले अधिकारियों ने बताया कि अल-जैदी का तेहरान दौरा व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ हुई उनकी हालिया मुलाक़ात के बाद हुआ था, जिसमें इराकी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रस्ताव पेश किया था।
'यह प्रस्ताव ही अभी एकमात्र विकल्प'
प्रस्तावित युद्धविराम समझौते की जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं थी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने NYT को बताया कि यह प्रस्ताव ही अभी एकमात्र विकल्प है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान ऐसी किसी अस्थायी व्यवस्था को स्वीकार करने में दिलचस्पी नहीं रखता, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण का मुद्दा हल न हो। ईरानी मीडिया के अनुसार, अल-ज़ैदी वरिष्ठ इराकी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान गए और उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार एमबी ग़ालिबाफ़ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बैठकें कीं।
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इराकी प्रधानमंत्री और पेज़ेश्कियान की मुलाक़ात के दौरान, ईरान के सरकारी मीडिया 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) से बात करते हुए अरागची ने कहा कि अल-ज़ैदी का वॉशिंगटन दौरे से जुड़ी अपनी 'राय और सोच' बताना 'स्वाभाविक' था। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, 'इराकी प्रधानमंत्री वॉशिंगटन गए थे। यह स्वाभाविक है कि वे इस दौरे से जुड़ी अपनी राय और सोच हमें बताएं, और यह सामान्य बात है।'
'सामना इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के मजबूत रुख से...'
अरागची ने आगे कहा कि ईरान को इस्लामिक रिपब्लिक के साथ निपटने के 'अमेरिकी नज़रिए' से समस्या है, जिसे उन्होंने 'तर्कहीन, ज़रूरत से ज़्यादा और दबदबा जमाने वाला' बताया। उन्होंने कहा, 'समस्या अमेरिकी नज़रिए की है - यानी इस देश का तर्कहीन, ज़रूरत से ज़्यादा और दबदबा जमाने वाला नज़रिया - जिसका सामना इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के मज़बूत रुख़ से हुआ है।'
जब हाल के हफ़्तों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है
युद्धविराम के प्रस्ताव को ऐसे समय में ठुकराया गया है जब हाल के हफ़्तों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आम लोगों से जुड़ी सुविधाओं—जैसे रेलवे, एयरपोर्ट, पुल और बंदरगाह—पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
'ईरान पूरे क्षेत्र में टकराव बढ़ा सकता है'
दो ईरानी अधिकारियों ने NYT को बताया कि अगर ट्रंप तेहरान और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की अपनी धमकी पर अमल करते हैं, तो देश की सेना संघर्ष के संभावित विस्तार की तैयारी कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र में टकराव बढ़ा सकता है, जिसमें तेल अवीव को निशाना बनाना और लाल सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने के लिए अपने हूती सहयोगियों से मदद लेना शामिल है।
