Israel Iran War: इजरायल-ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं। युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में भी बेचैनी बढ़ती जा रही है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $83 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल निर्यात को लेकर अमेरिका ने दी भारत को बड़ी राहत।
इसी बीच अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों के बीच आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। इसके तहत भारत को उन तेल खेपों को लेने और रिफाइन करने की अनुमति दी गई है, जो पहले से ही जहाजों पर मौजूद हैं।
अमरीका ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा, "हमें कम समय में बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत है। लंबी अवधि में तेल की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी दिक्कत हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आने-जाने वाली आपूर्ति में आ रही बाधाओं की वजह से हो रही है।"
शॉर्ट-टर्म उपाय से मिलेगी कई देशों को राहत
उन्होंने आगे कहा कि इसी स्थिति को देखते हुए हमने एक अल्पकालिक कदम उठाया है। दक्षिण एशिया के आसपास समुद्र में जो रूसी तेल के फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर मौजूद हैं, उन्हें बाजार में लाने की योजना बनाई गई है। चीन अपने सप्लायर्स के साथ बेहतर व्यवहार नहीं करता, इसलिए हमने भारत से कहा है कि वह इस तेल को खरीदे। वहीं, अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करे और फिर बाजार में सप्लाई बढ़ाए। इस कदम से दुनिया की अन्य रिफाइनरियों पर पड़ रहा दबाव कम होगा और वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
ईरान ने कई देशों के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट किया बंद
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी की बड़ी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद करना है। युद्ध की वजह से सप्लाई रुकने के डर से तेल की कीमतों में आग लग गई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की चिंता सताने लगी है। निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करता है। भारत अपनी तेल सप्लाई का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से हॉर्मुज स्टेट के रास्ते ही मंगाता है, जहां अब युद्ध की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है।
अमेरिका ने दी भारत को बड़ी राहत
हाल ही में अमेरिका ने एक बड़ी राहत दी। अमेरिकी ने रूसी तेल कंपनियों पर लगाए गए बैन को 30 दिन के लिए हटा लिया है। इस फैसले से समुद्र में फंसे कार्गो को भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को बेचा जा सकेगा।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर अब तक इसका असर नहीं पड़ा है। भारत सरकार ने कहा कि अब वे सिर्फ कतर के ऊपर गैस के भरोसे नहीं है, बल्कि नए बाजार की तलाश की जा रही है।
