Germany Telegram Drug Rape Network: जर्मनी में सक्रिय चीनी प्रेडेटर्स (ऑनलाइन अपराधियों) के एक ऐसे खौफनाक और घिनौने डिजिटल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे यूरोप को हिलाकर रख दिया है। यह गैंग मैसेंजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) पर 'जर्मन ड्राइविंग स्कूल फॉर एक्सपर्ट्स' (German Driving School for Experts) नाम से गुप्त ग्रुप चला रहा था।
बुधवार, 8 जुलाई, 2026 को बर्लिन (जर्मनी) में एक ऑनलाइन प्रिडेटर नेटवर्क के खिलाफ मुकदमे के दौरान अदालत में अपना चेहरा छिपाता हुआ एक आरोपी। इस नेटवर्क के पुरुषों पर आरोप है कि वे चैट ग्रुप का इस्तेमाल करके महिलाओं को नशीली दवा देकर उनके साथ रेप करने के तरीके शेयर करते थे। (AP फोटो)
अभियोजकों (Prosecutors) के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल अपराधी जर्मनी में रह रही चीनी मूल की महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर उनका यौन उत्पीड़न (Drug-Facilitated Sexual Assault) करते थे और टेलीग्राम पर गुप्त कोड्स के जरिए अपनी हैवानियत का जश्न मनाते थे। जर्मनी और यूरोपीय पुलिस की कई सालों की जांच के बाद इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां और सजाएं हो चुकी हैं और हाल ही में बर्लिन की अदालत में एक और मुख्य आरोपी को सजा सुनाई गई है।
'कार', 'फ्यूल' और 'ड्राइविंग'- इस खौफनाक सिंडिकेट के गुप्त कोड्स
अदालती दस्तावेजों और जांचकर्ताओं के अनुसार, इस टेलीग्राम नेटवर्क के चैट ग्रुप्स में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए खास सांकेतिक भाषा (Coded Language) का इस्तेमाल किया जाता था:
कोडनेम का खेल: जब ये अपराधी किसी महिला को नशा देने या उस पर हमला करने की बात करते थे, तो वे खुलेआम लिखने के बजाय 'कार' (Cars), 'फ्यूल' (Fuel) और 'ड्राइविंग' (Driving) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस या टेलीग्राम के सुरक्षा एल्गोरिदम को धोखा दिया जा सके।
अमानवीय मानसिकता: अदालत में पेश चैट रिकॉर्ड्स से खुलासा हुआ कि ये दरिंदे जिन महिलाओं का बलात्कार करते थे, उन्हें ग्रुप में 'मरा हुआ सुअर' (Dead Pigs) कहकर संबोधित करते थे। ग्रुप में इस बात की बकायदा टिप्स और सलाह शेयर की जाती थी कि किस महिला को बेहोश करने के लिए कौन सी नशीली दवा कितनी मात्रा में देनी है।
फ्रैंकफर्ट के मुख्य अभियोजक डोमिनिक मीस का बयान है, 'इन अपराधियों की पहचान उनकी अत्यधिक क्रूरता, पीड़ितों को महज एक वस्तु (Objectification) समझने की मानसिकता और अपने अपराधों की बेहद शातिर और अचूक प्लानिंग करने के तरीके से होती है।'
पीड़ितों को खुद के साथ हुए अपराध की भनक तक नहीं
यह प्रेडेटर नेटवर्क मुख्य रूप से जर्मनी में पढ़ रहे या काम कर रहे चीनी पुरुषों का था, जो वहां रह रही चीनी मूल की अकेली महिलाओं को ही अपना शिकार बनाते थे।
50,000 मेंबर्स का जाल: पीड़ित महिला की पैरवी करने वाली वकील मैग्डालेना गेभार्ड ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने वाला एक आंतरिक कोर ग्रुप था जिसमें 8 मुख्य आरोपी थे, लेकिन इनके टेलीग्राम ग्रुप्स में 50,000 से अधिक सदस्य जुड़े हुए थे जो इन वीडियो और चैट्स को देखते थे।
पीड़िता को पता ही नहीं चला: यह नेटवर्क कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एडवांस्ड सेडेटिव (नशीली दवा) के ओवरडोज के कारण पीड़ित महिलाएं पूरी तरह सुध-बुध खो बैठती थीं। वकील गेभार्ड की मुवक्किल को तो यह पता ही नहीं था कि उसके साथ बलात्कार हुआ है, उसे तब भनक लगी जब पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के पास से उसका वीडियो फुटेज बरामद किया।
मुख्य साजिशकर्ता को जेल
पुलिस का एक्शन: मास्टरमाइंड 'दापेंग' और 'झिटिंग' को जेल
जर्मन पुलिस को इस नेटवर्क के बारे में पहली बार 2024 में पता चला, जब फ्रैंकफर्ट में रहने वाले इस गैंग के सरगना दापेंग जेड (Dapeng Z.) ने अपनी रणनीति बदलते हुए जान-पहचान की महिलाओं की जगह इंटरनेट पर अजनबी महिलाओं को टारगेट करना शुरू किया।
रिंगलीडर दापेंग को 14 साल की सजा: जर्मन पुलिस ने चीनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर 2024 में दापेंग को गिरफ्तार किया था। फरवरी में जर्मन अदालत ने उसे गंभीर बलात्कार, हत्या के प्रयास और अन्य अपराधों के लिए 14 साल की जेल की सजा सुनाई (जिसके खिलाफ उसने अपील की है)।
बर्लिन में झिटिंग को 5 साल की सजा: हाल ही में (बुधवार को), इस नेटवर्क के एक अन्य 32 वर्षीय सदस्य झिटिंग एस. (Zhiting S.) को, जो एक प्रशिक्षित मेडिकल कर्मी था, बलात्कार में सहयोग करने का दोषी पाया गया और 5 साल की जेल की सजा सुनाई गई। उसने चैट में दापेंग को हमले से पहले एक खास नशीली दवा का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।
वैश्विक स्तर पर फैला जाल: फ्रांस की 'पेलीकॉट' घटना की गूंज
इस जर्मन मामले की तुलना फ्रांस के ऐतिहासिक 'गिसेले पेलीकॉट' (Gisèle Pelicot) मामले से की जा रही है, जहां एक पति अपनी पत्नी को एक दशक तक नशा देकर अजनबियों से उसका बलात्कार करवाता था।
म्यूनिख के जज मार्कस कोपेनलीटनर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'पेलीकॉट कोई अकेली घटना नहीं है। यह कोई चीनी या फ्रांसीसी घटना नहीं है, बल्कि यह मानसिकता जर्मनी और दुनिया भर में मौजूद है।'
जर्मन पुलिस से मिले सुरागों के बाद दुनिया भर में ऐसे मामलों पर कार्रवाई तेज हो गई है:
लॉस एंजिल्स (LA): अमेरिका में चीन के एक ग्रेजुएट छात्र को 3 महिलाओं को नशा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में पकड़ा गया, जिसने दवाइयां जर्मनी में मौजूद एक चीनी नागरिक से मंगवाई थीं।
नीदरलैंड: डच पुलिस ने 4 ऐसे पुरुषों को गिरफ्तार किया जो सोशल मीडिया ग्रुप्स में महिलाओं को नशा देने और उनके यौन शोषण के वीडियो प्रसारित करने का धंधा चला रहे थे।
'प्रोजेक्ट मेडुसा' (Project Medusa): यूरोपोल (Europol) ने जर्मनी और ब्रिटेन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय अभियान 'प्रोजेक्ट मेडुसा' शुरू किया है, जिसके तहत ऑनलाइन ड्रग-रेप नेटवर्कों को ध्वस्त करते हुए अब तक 57 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।
कटघरे में टेलीग्राम, चीन में सेंसरशिप का खेल
इस मामले ने एक बार फिर टेलीग्राम ऐप की सुरक्षा और उसकी निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह क्रिमिनल नेटवर्क 2020 से टेलीग्राम पर बिना किसी रोक-टोक के फल-फूल रहा था। हालांकि टेलीग्राम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे यौन हिंसा से जुड़े कंटेंट को तुरंत हटाते हैं और यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) का पालन करते हैं।
दूसरी ओर, इस मामले को लेकर जर्मनी में रह रहे चीनी समुदाय (विशेषकर महिलाओं) में भारी आक्रोश है। वे पीड़ितों के समर्थन में कोर्ट रूम के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। चीन में जहां सरकारी मीडिया इस खबर को कवर कर रहा है, वहीं चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे 'रेडनोट' (Rednote) पर इस घटना से जुड़े 'डेट रेप' जैसे कीवर्ड्स और चर्चाओं को चीनी सेंसर बोर्ड द्वारा आंशिक रूप से सेंसर और डिलीट किया जा रहा है।
