US to strike on Iran : ईरान पर अमेरिका का हमला फिर हो सकता है। रिपोर्टों की मानें तो ईरान पर 'छोटा लेकिन पुरजोर हमला' करने का प्लान अमेरिकी सेना का सेंट्रल कमांड पूरी तरह बना चुका है। उसे बस ट्रंप से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। ट्रंप की इजाजत मिलते ही वह ईरान पर हमला शुरू कर देगा। हम यह बात ऐसे नहीं कह रहे हैं। अमेरिकी मीडिया एक्सिओस ने इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। एक्सिओस के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने जो तीन शर्तें रखी थीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे ठुकरा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
नेवल ब्लॉकेड जारी रहेगा-ट्रंप
ट्रंप ने साफ कहा है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करने वाले डील के लिए ईरान जब तक तैयार नहीं हो जाता तब तक ओमान के पास उसका नेवल ब्लॉकेड जारी रहेगा। ट्रंप के इस रुख के बाद बातचीत के जरिए होर्मुज खोलने की जो एक उम्मीद थी, वह खत्म होती दिख रही है। एक्सिओस की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी सेना इस बार ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं पर छोटा, तेज और प्रभावी हमला करेगी। बताया जा रहा है कि इस हमले का मकसद ईरान पर दबाव डालकर उसे बाचतीत की टेबल पर लाना है। लेकिन ट्रंप के रुख और अमेरिका के हमले की तैयारी के बावजूद
युद्ध खत्म करने के लिए ईरान ने रखी हैं 3 शर्तें
ईरान ने अभी ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वह बातचीत के लिए आगे आ रहा है। यहां यह जानना भी जरूरी है कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान ने जो तीन शर्तें रखी हैं, वे कौन सी हैं। ईरान की पहली शर्त है कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए ओमान के पास जो नेवल ब्लॉकेड लगाया है, उसे हटाना होगा। दूसरी शर्त है-अमेरिका को मध्य पूर्व में यानी लेबनान और उस पर हमले बंद करने होंगे। ये दोनों शर्तें जब पूरी हो जाएंगी तो वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के लिए तैयार होगा।
120 डॉलर के पार पहुंची क्रूड ऑयल की कीमत
चूंकि ईरान की ये शर्तें खारिज हो चुकी हैं और अमेरिका का सेंट्रल कमांड हमला करने के लिए लॉक्ड एवं कॉक्ड है। ऐसे में युद्ध के बादल नए सिरे से मंडरा रहे हैं। ईरान भी चुप नहीं है। उसने कहा है कि हमला होने पर वह अपने नए हथियारों से हमला करेगा। उसने अभी तक अपने इन हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है। ट्रंप के ताजा रुख के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर 12द डॉलर के पार पहुंच गई हैं। होर्मुद बंद होने से सऊदी अरब, इराक, कतर, यूएई का तेल और गैस बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा। इससे दुनिया भर में भारी दिक्कत हो रही है और महंगाई बढ़ रही है। होर्मुज में बना गतिरोध कब टूटेगा, इसके आसार अभी नहीं दिख रहे हैं। लेकिन एक बात तय है कि ईरान पर अमेरिका का हमला यदि दोबारा होता है तो मध्य पूर्व में युद्ध की आग फिर से भड़क उठेगी और इसकी लपटें यहां से निकलकर कहीं और भी जा सकती हैं यानी इसका दायरा और रूप बड़ा हो सकता है।
