Gaza Board Of Peace: चीन ने ठुकराया, भारत ने अब तक नहीं साफ किया रुख; ट्रंप के प्लान को वैश्विक स्वीकार्यता मिलना कितना कठिन?

डोनाल्ड ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा में शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम करना शुरू कर देगा। पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच मिस्र, कतर, अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी। ऐसे में चीन का ​यह बयान ट्रंप के प्लान की वैश्विक स्वीकार्यता के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

चीन ने ट्रंप के गाजा पीस ऑफ बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। चीन ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। ये टिप्पणी X पर एक पोस्ट में भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने की। वहीं, ट्रंप के प्लान पर अगर भारत के रुख की बात करें तो भारत ने अभी तक इस पर अपना जवाब नहीं दिया है। ऐसे में देखना यह होगा कि ट्रंप के इस प्लान को वैश्विक स्वीकार्यता मिल भी पाएगी या नहीं।

Jinping trump

ट्रंप-जिनपिंग (ANI)

उन्होंने चीनी विदेश मंत्रालय (एमओएफए) के हवाले से कहा कि चीन को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का निमंत्रण प्राप्त हुआ है। चीन हमेशा से सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करता आया है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव आए, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनाई गई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध रहेगा।

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