चीन में निमोनिया और सांस की बीमारी से जुड़े मामलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से चिंता जताए जाने के बाद चीनी अधिकारियों ने साफ किया है कि उनके मुल्क में कोई ‘‘असामान्य या फिर नई बीमारी’’ सामने नहीं आई है।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
चीनी अधिकारियों ने बताया कि उनके देश में कोई ‘‘असामान्य या नयी बीमारी’’ सामने नहीं आई है और इससे देश के अस्पतालों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये चीनी अधिकारियों द्वारा पहले बताए गए श्वसन संक्रमण के मामलों में वृद्धि है या अलग-अलग मामलों से जुड़े हैं।’’ डब्ल्यूएचओ ने कहा कि उत्तरी चीन में पिछले तीन वर्षों की तुलना में अक्टूबर के मध्य से इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों में वृद्धि दर्ज की गई थी।
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा स्थिति पर कड़ी निगरानी की जरूरत है, पर वे यह बात पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि चीन में सांस से जुड़ी बीमारियों में हालिया वृद्धि किसी नए वैश्विक संक्रमण की शुरुआत का संकेत है या नहीं।
दरअसल, मीडिया में खबरें आई थीं कि उत्तरी चीन में बच्चों को अजीब तरह का निमोनिया हो रहा है। इस दौरान वैश्विक संक्रामक रोग निगरानी सेवा की रिपोर्टों का हवाला दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी डब्ल्यूएचओ ने चीन से इस बाबत (चिंताजनक वृद्धि के बारे में) जानकारी देने का आधिकारिक अनुरोध किया था, जिसके बाद चीन के अफसरों की ओर से जवाब आया है।
महामारी फैला सकने वाले किसी वायरस के संक्रमण की शुरुआत आम तौर पर सांस से जुड़ी बीमारी के अज्ञात स्वरूप से शुरू होती है। सार्स और कोविड-19 दोनों को सबसे पहले असामान्य प्रकार का निमोनिया बताया गया था। (एपी-भाषा इनपुट्स के साथ)
