Anas al-Sharif Killed in Gaza: इजराइल की सेना ने रविवार को कुछ मीडिया संस्थानों के संवाददाताओं को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। इस हमले में ‘अल जजीरा’ के एक संवाददाता, कुछ अन्य मीडिया संस्थानों के पांच पत्रकारों और दो अन्य लोगों की मौत हो गई।इजराइली हमले में मारे गए सभी लोग ‘गाजा सिटी हॉस्पिटल’ परिसर के बाहर शरण लिए हुए थे।
पत्रकार अनस अल शरीफ की गाजा में मौत (Al Jazeera)
‘शिफा हॉस्पिटल’ के अधिकारियों ने बताया कि मारे गए लोगों में ‘अल जजीरा’ के संवाददाता अनस अल-शरीफ और मोहम्मद कुरैका शामिल हैं।
अस्पताल के प्रशासनिक निदेशक रामी मोहन्ना ने बताया कि हमले में चार अन्य पत्रकार और दो अन्य लोग भी मारे गए। हमले में अस्पताल परिसर के आपातकालीन भवन का प्रवेश द्वार भी क्षतिग्रस्त हो गया।
इजराइल और गाजा शहर के अस्पताल अधिकारियों ने पत्रकारों की मौत की पुष्टि की, जिसे प्रेस पैरोकारों ने गाजा में युद्ध का दस्तावेजीकरण करने वालों के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है।इजराइल की सेना ने बाद में रविवार को अल-शरीफ को ‘हमास सेल’ का नेता बताया। इस आरोप को ‘अल जजीरा’ और अल-शरीफ ने पहले निराधार बताकर खारिज कर दिया था।युद्ध के दौरान यह पहली बार है, जब इजराइल की सेना ने हमले में किसी पत्रकार के मारे जाने के बाद तुरंत जिम्मेदारी ली हो।
IDF ने अल-शरीफ को हमास आतंकवादी समूह का नेता बताया
रविवार देर रात एक बयान में इजराइली सेना ने दावा किया कि अल-शरीफ ने पत्रकार होने का नाटक किया था और कहा कि वह हमास के साथ था। पत्रकारों की सुरक्षा समिति ने पिछले महीने कहा था कि वह अल-शरीफ की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है और कहा कि वह इजराइली सेना की बदनामी अभियान का निशाना था।
इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दावा किया कि अनस अल-शरीफ हमास आतंकवादी समूह का नेता था। उसके बयान के अनुसार, अल-शरीफ इजराइली नागरिकों और सैनिकों पर रॉकेट हमलों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार था। सेना ने उसकी हत्या को मीडियाकर्मियों पर हमले के बजाय एक लक्षित आतंकवाद-रोधी अभियान बताया। वहीं, अल जजीरा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और इन्हें निराधार बताया और कहा कि इनका उद्देश्य उस पत्रकार की हत्या को उचित ठहराना है जिसने पूरे संघर्ष के दौरान गाजा से रिपोर्टिंग की थी। नेटवर्क ने इसी हमले में मोहम्मद कराइकिया, इब्राहिम जहीर और मोहम्मद नौफल की मौत की पुष्टि की। शिफा अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा कि कुल सात लोग मारे गए, जिनमें चार पत्रकार भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र और प्रेस स्वतंत्रता समूहों ने चिंता जताई थी
पिछले महीने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत आइरीन खान ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि अल-शरीफ की जान को खतरा है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ इजराइल के आरोपों में पुष्ट सबूतों का अभाव है और उनका इस्तेमाल घातक हमले को वैध ठहराने के लिए किया जा सकता है। पत्रकारों की सुरक्षा समिति ने भी जुलाई में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था। फिलिस्तीनी पत्रकार संघों ने इन हत्याओं को गाजा में पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की एक प्रवृत्ति का विस्तार बताया है।
