कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो धीरे-धीरे हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। फिर चाहे वह कोई इंसान हो या रोज साथ रहने वाली कोई चीज। केरल के KSRTC ड्राइवर पॉल कुरियन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने करीब 18 साल तक बस के पहिये के पीछे अपनी ड्यूटी निभाई लेकिन रिटायरमेंट का दिन आया तो अपनी बस से दूर होना उनके लिए आसान नहीं था। उनकी विदाई का एक भावुक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो (Video) में एक ऐसे ड्राइवर की कहानी दिखाई गई है, जिसने सालों तक एक बस को सिर्फ अपनी ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना, बल्कि उसे अपने सफर का साथी बना लिया।
18 साल तक निभाई ड्यूटी
जानकारी के मुताबिक, पॉल कुरियन ने केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) में 18 साल तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने कुमिली और कट्टप्पना डिपो में काम किया। उनके करियर के आखिरी आठ साल एक ही बस RPE 741 के साथ गुजरे। यह बस कुम्बुम-कुमिली-करुवाकुलम-कोट्टायम रूट पर चलती थी। यानी रोज बस की शुरुआत से लेकर यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने तक, कुरियन की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा इसी बस के साथ बीता।
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खुद बस धोकर करते थे तैयार
कुरियन के साथी कर्मचारी अनंतू मोहन दास ने उनकी मेहनत और लगाव को याद किया। उन्होंने बताया कि कुरियन अक्सर समय से पहले डिपो पहुंच जाते थे। बस चलाने से पहले वह खुद उसकी सफाई करते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि बस यात्रियों के लिए पूरी तरह तैयार हो। उनके लिए बस सिर्फ एक मशीन नहीं थी। वह उसकी देखभाल भी उसी तरह करते थे, जैसे कोई अपने बेहद करीबी सामान की करता है। इसी रिश्ते को बताते हुए उनकी विदाई पोस्ट में लिखा गया कि जब कोई ड्राइवर अपने वाहन से सच में प्यार करता है, तो वह वाहन भी उसे अपना सा लगने लगता है।
बिना हादसे पूरा किया करियर
रिपोर्ट के मुताबिक, कुरियन ने अपने लंबे करियर को बिना किसी दुर्घटना के पूरा किया। करीब दो दशक तक जिम्मेदारी से बस चलाने के बाद अब उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया है। उनकी आखिरी ड्यूटी के बाद बस से विदाई का पल देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
VIDEO देख लोग हुए भावुक
सोशल मीडिया (Social Media) पर वीडियो (Video) सामने आने के बाद लोगों ने कुरियन को रिटायरमेंट की शुभकामनाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने उन्हें बस चलाते हुए देखा है और उनके लिए यह विदाई काफी भावुक पल है। एक यूजर ने इसे कुमिली से उनकी आखिरी यात्रा बताया। वहीं दूसरे लोगों ने उनके लंबे और बेदाग करियर की तारीफ की। 18 साल तक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाले पॉल कुरियन अब अपनी जिंदगी के एक नए सफर पर निकल चुके हैं। उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि किसी काम को सिर्फ नौकरी समझकर नहीं, बल्कि पूरी ईमानदारी और लगन से किया जाए तो उससे एक खूबसूरत रिश्ता भी बन जाता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
