Interesting Facts: चीन के युन्नान प्रांत में रहने वाले बुलंग जातीय समुदाय की एक अनोखी परंपरा है। यहां जब बच्चे किशोरावस्था में पहुंचते हैं, तो वे अपने दांतों को काला रंगते हैं। इस परंपरा को ‘रांची’ कहा जाता है। बुलंग लोग इसे बड़े होने और समाज का हिस्सा बनने का प्रतीक मानते हैं। बुलंग समुदाय का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह जातीय समूह मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम चीन के पहाड़ी और जंगलों वाले इलाकों में रहता है। चाइना स्टैटिस्टिकल ईयरबुक 2021 के अनुसार, आज करीब 1 लाख 27 हजार बुलंग लोग चीन में रहते हैं।
Interesting Facts: यहां जवान होते ही लोगों के काले हो जाते हैं दांत (फोटो:SCMP)
14 या 15 साल के होते हैं लड़के और लड़कियां
बुलंग लोग काले रंग को सुंदरता और ताकत का प्रतीक मानते हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, उनका विश्वास है कि काले दांत बुरी शक्तियों और बीमारियों से बचाते हैं। इसलिए उनके समाज में काले दांत होना गर्व की बात मानी जाती है। जब लड़के और लड़कियां करीब 14 या 15 साल के होते हैं, तब वे इस रस्म से गुजरते हैं। इस दौरान वे एक-दूसरे के दांत रंगते हैं, अक्सर यह काम लड़का-लड़की मिलकर करते हैं। सबसे पहले वे खट्टे फल खाते हैं या दांतों पर खट्टा रस लगाते हैं, जिससे दांत तैयार हो जाते हैं। इसके बाद जलती हुई लकड़ी या देवदार के पेड़ की राल से निकलने वाले धुएं से दांतों को काला किया जाता है।
यह सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक संस्कार
कुछ लोग सुपारी, तंबाकू और चूने का भी इस्तेमाल करते हैं। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चल सकती है। यह सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक संस्कार है। इसका मतलब होता है कि अब वह व्यक्ति गांव के जीवन में पूरी तरह शामिल होने के लिए तैयार है। अगर कोई इस परंपरा का पालन नहीं करता, तो उसे समाज में कुछ अधिकार नहीं मिलते। इसलिए बुलंग समुदाय में रांची को बहुत जरूरी माना जाता है। यह परंपरा उनकी संस्कृति, विश्वास और पहचान को दिखाती है।
