Post-Festive Budgeting: फेस्टिव सीजन (Festive Season) शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। लोग कपड़े, मिठाइयां, गिफ्ट और घर की सजावट पर जमकर पैसा खर्च करने लगते हैं। त्योहारों की खुशी में कई बार खर्चों का हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है। नतीजा यह होता है कि त्योहार खत्म होने के बाद बैंक अकाउंट में बहुत कम पैसे बचते हैं। नवंबर में दिवाली है ऐसे में घर का किराया, बच्चों की फीस, राशन और दूसरी जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। आपके साथ ऐसा न हो, इसके लिए अक्टूबर में ही नवंबर के जरूरी खर्चों की प्लानिंग कर सकते हैं-
त्योहारों के बाद खाली न हो जाए बैंक अकाउंट, आप न करें ये गलतियां (AI Generated Image)
नवंबर के जरूरी खर्चों की लिस्ट बनाएं
सबसे पहले नवंबर में होने वाले सभी जरूरी खर्चों की लिस्ट तैयार करें। इसमें घर का किराया, लोन की EMI, बच्चों की स्कूल फीस, बिजली-पानी का बिल, राशन और आने-जाने का खर्च शामिल करें। इसके बाद सभी खर्चों को जोड़कर कुल रकम निकालें। इससे पता चलेगा कि अगले महीने के लिए कितने पैसे सुरक्षित रखने जरूरी हैं।
सैलरी मिलते ही अलग रखें पैसे
अक्टूबर की सैलरी मिलते ही नवंबर के जरूरी खर्चों की रकम पहले ही अलग कर दें। इसके लिए दूसरे बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। कोशिश करें कि इस पैसे का इस्तेमाल त्योहारों की खरीदारी में न हो। इससे अगले महीने जरूरी भुगतान करने में आसानी होगी।
फेस्टिव शॉपिंग के लिए तय करें लिमिट
त्योहारों की खरीदारी के लिए अलग बजट बनाना जरूरी है। उदाहरण के लिए अगर आपके पास 50,000 रुपये हैं और नवंबर के जरूरी खर्च 30,000 रुपये हैं तो बाकी 20,000 रुपये पूरे खर्च करने की जरूरत नहीं है। इसमें से कुछ पैसा इमरजेंसी के लिए रखें और बची रकम से त्योहार मनाएं।
क्रेडिट कार्ड और EMI का हिसाब रखें
कई लोग त्योहारों में क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते हैं। इससे तुरंत बैंक अकाउंट से पैसे नहीं कटते, लेकिन अगले महीने बिल चुकाना पड़ता है। इसलिए अक्टूबर में की गई खरीदारी का भुगतान नवंबर के बजट में जरूर जोड़ें। नई EMI लेने से पहले मौजूदा किस्तों का हिसाब भी लगाएं।
खर्चों की समीक्षा करें
नवंबर का महीना शुरू होने में 10 दिन का ही समय बचा है। ऐसे में इन 10 दिन के खर्चों को दिन खत्म होने पर चेक किया जा सकता है कि कहां कितना पैसा खर्च हुआ। देखें कि फेस्टिव बजट में कितनी रकम बची है। गैरजरूरी खरीदारी कम करें, लेकिन त्योहारों की खुशियों से समझौता न करें।
