बिहार में स्मार्ट मीटर इस्तेमाल करने वाले कई बिजली उपभोक्ताओं का प्री-पेड बैलेंस अचानक कम होने या पूरी तरह खत्म होने की खबर सामने आई है। बैलेंस में अचानक हुई इस कटौती को लेकर उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब बिजली कंपनी ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि अगस्त के बिजली बिल में जून और जुलाई का बकाया फिक्स्ड चार्ज एक साथ जोड़ दिया गया है। इसी वजह से कई उपभोक्ताओं के प्री-पेड बैलेंस से सामान्य से ज्यादा रकम कट गई।
फिक्स्ड चार्ज भी बिल का अहम हिस्सा
अगस्त के बिल में जुड़ा दो महीने का बकाया फिक्स्ड चार्ज
बिजली कंपनी के मुताबिक, जून और जुलाई महीने का फिक्स्ड चार्ज बकाया रह गया था। अब इस बकाया राशि को अगस्त के बिजली बिल में शामिल किया गया है। इसके चलते स्मार्ट मीटर वाले कई उपभोक्ताओं के खाते से एक साथ ज्यादा राशि कट गई और उनका प्री-पेड बैलेंस अचानक काफी कम हो गया या खत्म हो गया। कंपनी का कहना है कि यह अतिरिक्त कटौती किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से नहीं, बल्कि पहले के महीनों के बकाया फिक्स्ड चार्ज को मौजूदा बिल में समायोजित किए जाने के कारण हुई है।
खपत और अधिकतम लोड के आधार पर बनता है बिल
स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल हर महीने इस्तेमाल की गई बिजली की खपत और उस अवधि के दौरान दर्ज किए गए अधिकतम लोड के आधार पर तैयार किया जाता है। यानी बिल में सिर्फ बिजली की खपत ही नहीं, बल्कि मीटर में दर्ज अधिकतम लोड को भी ध्यान में रखा जाता है।
संबंधित महीने की बिजली खपत का बिल आमतौर पर अगले महीने की 1 या 2 तारीख के आसपास तैयार किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि उपभोक्ता ने महीने के दौरान कितनी यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया और स्मार्ट मीटर में अधिकतम कितना लोड दर्ज हुआ।
फिक्स्ड चार्ज भी बिल का अहम हिस्सा
बिजली बिल की राशि तय करते समय बिजली की खपत के साथ फिक्स्ड चार्ज भी जोड़ा जाता है। यह चार्ज उपभोक्ता के कनेक्शन और दर्ज अधिकतम लोड से संबंधित होता है। इसी वजह से किसी महीने में बिजली की खपत कम होने के बावजूद बिल की राशि अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती है।
बिहार के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के मामले में जून और जुलाई का फिक्स्ड चार्ज बकाया रहने के बाद इसे अगस्त के बिल में जोड़ने से प्री-पेड बैलेंस पर एक साथ असर पड़ा है। कंपनी की ओर से इस कटौती को पुराने बकाये के समायोजन के तौर पर बताया गया है।
