गुजरात से शुरू हुआ SD Pay नाम का एक मोबाइल ऐप आज देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक बनकर सामने आया है। इस ऐप के जरिए लोगों को हर दिन मोटा ब्याज और रेफरल के नाम पर कमाई का लालच दिया गया। शुरुआत में कुछ लोगों को अच्छा पैसा भी मिला, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ता गया। देखते ही देखते लाखों लोग इस ऐप से जुड़ गए और अपनी जिंदगी भर की कमाई इसमें लगा दी।
ऑनलाइन पेमेंट करते समय आपको बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। (फोटो क्रेडिट-AI)
लेकिन जब लोगों ने अपना पैसा निकालना चाहा, तो ऐप बंद हो चुका था। किसी का घर बिक गया, किसी ने कर्ज लेकर पैसा लगाया तो किसी ने परिवार की बचत इसमें लगा दी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले में करीब 1,211 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में 18 FIR दर्ज हो चुकी हैं और 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
फ्लैट बेचकर लगाए 9.5 लाख रुपये
इस घोटाले की शिकार हुईं वडोदरा की एक 48 साल की महिला टीचर की कहानी बेहद दुखद है। वह अकेले अपने कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे की परवरिश कर रही थीं। साल 2025 में उन्होंने अपना एक कमरे वाला फ्लैट बेचकर मिले 9.5 लाख रुपये SD Pay ऐप में लगा दिए। शुरुआत में उन्हें ऐप से अच्छा रिटर्न मिलने लगा। धीरे-धीरे उनके खाते में दिखाई देने वाली रकम बढ़कर 50 लाख रुपये तक पहुंच गई। लेकिन जून 2026 में ऐप बंद हो गया और वह अपनी रकम नहीं निकाल पाईं।
महिला ने बताया कि जुलाई 2025 में उनकी मुलाकात वडोदरा में SD Pay से जुड़े एक व्यक्ति से हुई थी। पहले उन्होंने इस ऐप में पैसा लगाने से मना कर दिया था। लेकिन ऐप से जुड़े लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाने के लिए एस्क्रो वॉलेट और कई दस्तावेज दिखाए। इतना ही नहीं, उन्होंने एक साइन किया हुआ खाली चेक भी महिला को दे दिया। उनसे कहा गया कि अगर भरोसा नहीं है तो चेक पर अपनी रकम भरकर कभी भी पैसे निकाल सकती हैं। इस तरह महिला को भरोसा हो गया और उन्होंने अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई ऐप में लगा दी।
हर दिन 0.15 से 0.30 फीसदी ब्याज देने का वादा
पुलिस के मुताबिक, SD Pay और Apna Pay ऐप को साल 2024 में धवल पटेल ने शुरू किया था। इन ऐप का दावा था कि इनके जरिए लोग आसानी से मोबाइल रिचार्ज और बिजली-पानी जैसे बिलों का भुगतान कर सकते हैं। लेकिन ऐप के जरिए असली कमाई का तरीका कुछ और ही था। लोगों को इसमें पैसा जमा करने पर हर दिन 0.15 से 0.30 फीसदी तक ब्याज देने का लालच दिया जाता था।
यानी जितना ज्यादा पैसा निवेश करेंगे, उतना ही ज्यादा रिटर्न मिलेगा। शुरुआत में लोगों को पैसे भी मिले। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और वे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को भी इस ऐप से जोड़ने लगे। पुलिस का कहना है कि इस पूरे सिस्टम में कोई असली कारोबार नहीं हो रहा था। न कोई सामान बनाया जा रहा था, न कोई सर्विस दी जा रही थी और न ही कोई ऐसा बिजनेस था, जिससे इतनी कमाई हो सके।
पुराने निवेशकों को ब्याज देने के लिए नए लोगों से आने वाले पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा था। यानी जो लोग बाद में ऐप से जुड़ रहे थे, उनके पैसों से पहले निवेश करने वालों को भुगतान किया जा रहा था।
रेफरल के नाम पर बनाया गया लोगों को जोड़ने का जाल
SD Pay ने लोगों को जोड़ने के लिए रेफरल सिस्टम बनाया था। इसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति अपने जानने वालों को ऐप से जोड़ता है, तो उसे कमीशन मिलेगा। पुलिस के मुताबिक, इस सिस्टम में अलग-अलग लेवल बनाए गए थे। पहले लेवल पर नए निवेशक को जोड़ने वाले व्यक्ति को 30 फीसदी तक भुगतान देने का वादा था। वहीं 10वें से 15वें लेवल तक के लोगों को 3 फीसदी तक कमीशन देने की बात कही गई थी।
इस लालच में कई लोग खुद ही इस ऐप का प्रचार करने लगे। शुरुआत में पैसा कमाने वाले लोग इसे अपना फुल टाइम काम बनाने लगे। वे अपने नीचे नए लोगों की टीम तैयार करते और उनसे निवेश करवाते थे। इस तरह कई लोग खुद भी ठगी का शिकार हुए और अनजाने में दूसरे लोगों को भी इस जाल में फंसाते चले गए।
31 लोगों ने लगाए 42 लाख रुपये
वडोदरा की महिला टीचर ने बताया कि जब उन्हें ऐप से अच्छा रिटर्न मिलने लगा तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए पोस्ट डाली। उनकी पोस्ट देखकर उनके जानने वाले 31 लोग इस ऐप से जुड़ गए। इनमें उनके परिवार के 11 सदस्य भी शामिल थे। उनकी विधवा बहन, 70 साल से ज्यादा उम्र की मां और भाई ने मिलकर करीब 30 लाख रुपये निवेश किए। इसके अलावा उनकी 20 सहकर्मियों ने भी लगभग 12 लाख रुपये लगा दिए।
महिला के मुताबिक, बाद में उन्हें पता चला कि उनके जरिए जुड़े लोगों के आगे भी रेफरल के माध्यम से करीब 800 लोग इस नेटवर्क में शामिल हो चुके थे। एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें ब्याज और रेफरल कमीशन मिलाकर रोजाना करीब 25 हजार रुपये मिल रहे थे। पुलिस के मुताबिक, कई लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग खाते भी खुलवाए थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा रेफरल कमीशन मिल सके।
60 लाख का कर्ज ले लिया
इस घोटाले में कई ऐसे लोग भी फंस गए, जिन्होंने ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में कर्ज लेकर निवेश किया। पुलिस को सुरेंद्रनगर का एक ऐसा व्यक्ति मिला, जिसने SD Pay में पैसा लगाने के लिए अपने नाम पर 20 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया। इसके बाद पत्नी के नाम पर भी 20 लाख रुपये का लोन लिया और फिर 20 लाख रुपये का गोल्ड लोन भी ले लिया। इस तरह उसने कुल 60 लाख रुपये ऐप में लगा दिए। उसका सपना था कि ब्याज से अच्छी कमाई करके अपना घर बना सके। लेकिन अब वह अपना मूल पैसा भी वापस नहीं निकाल पा रहा है।
IPO और शेयर का नया खेल शुरू हुआ
पुलिस के मुताबिक, साल 2025 में इस ऐप का नेटवर्क तेजी से बढ़ा। लेकिन जब नए लोगों का पैसा आना कम होने लगा, तो पुराने निवेशकों को ब्याज देना मुश्किल हो गया। मार्च 2026 तक निवेशकों को मिलने वाला रिटर्न रुकने लगा। इसके बाद ऐप चलाने वालों ने एक नया तरीका निकाला।
उन्होंने लोगों से कहा कि जल्द ही कंपनी शेयर बाजार में अपना IPO लाने वाली है। जिन लोगों का पैसा ऐप में फंसा हुआ था, उन्हें नकद रकम लौटाने के बजाय कंपनी के शेयर देने शुरू कर दिए गए। वडोदरा की महिला टीचर ने बताया कि जब उन्होंने शेयर लेने से मना किया, तो उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने 40 लाख रुपये के शेयर नहीं लिए तो उन्हें अपना पैसा वापस नहीं मिलेगा। महिला के मुताबिक, कंपनी ने यह भी कहा कि जिन लोगों का निवेश 15 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें शेयर लेना ही होगा।
20 रुपये के शेयर को 100 रुपये तक पहुंचाने का दावा
अमरेली के एसपी संजय खरात के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार संतोष पाठक ने करीब 1 लाख लोगों को इस नेटवर्क से जोड़ा था। 30 अक्टूबर तक उसके SD Pay खाते में करीब 16 करोड़ रुपये की रकम दिखाई दे रही थी। आरोपियों ने उसे कंपनी के 2 लाख शेयर देने की रसीद भी दी थी। इन शेयरों की कीमत 20 रुपये प्रति शेयर बताई गई थी। साथ ही दावा किया गया था कि जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होगी, तब इसकी कीमत बढ़कर 100 रुपये तक पहुंच जाएगी। लेकिन पुलिस के मुताबिक, यह IPO और शेयर देने का पूरा मामला निवेशकों का पैसा लौटाने से बचने का एक तरीका था।
पुलिस को नजर आई गड़बड़ी
इस मामले में 6 जून 2026 को सावरकुंडला के एक 32 साल के कंप्यूटर ऑपरेटर ने अमरेली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि अशिष गेडिया और भावेश चौहान ने ऐप के जरिए उसके 2 लाख रुपये ठग लिए हैं। हालांकि, शिकायत की जानकारी आरोपियों को मिलते ही उन्होंने उस व्यक्ति को उसके पैसे बैंक ट्रांसफर के जरिए वापस कर दिए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली। लेकिन पुलिस को इस पूरे मामले में कुछ गड़बड़ नजर आई।
पुलिस के मुताबिक, निवेशकों से शुरुआती रकम नकद में ली जा रही थी और पैसा वापस बैंक खाते में भेजा जा रहा था। इस वजह से पुलिस को शक हुआ। जांच में पता चला कि इस तरह की शिकायतें पहले भी अलग-अलग राज्यों से सामने आ चुकी थीं। इसके बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी।
पुलिसकर्मी की पत्नी भी हुईं ठगी का शिकार
जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसा मामला मिला, जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। एक पुलिसकर्मी की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने SD Pay में 10 लाख रुपये लगाए थे, लेकिन अब उनका पैसा वापस नहीं मिल रहा है। इसके बाद अमरेली पुलिस ने 2 सितंबर 2026 को इस मामले में FIR दर्ज की।
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के अलावा BUDS एक्ट, गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट, प्राइज चिट्स और मनी सर्कुलेशन स्कीम पर रोक लगाने वाले कानून और IT एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
धवल पटेल समेत 12 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने 2 सितंबर को अलग-अलग जगहों से पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 12 सितंबर को मुख्य आरोपी धवल पटेल और हिरन शाह को गुजरात और ओडिशा पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया।
उस समय दोनों संबलपुर जा रहे थे। इस मामले में अब तक कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, गुजरात के नरेंद्रसिंह झाला और राजस्थान के मुकेश लोढ़ी समेत कुछ आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से सात ने जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन BUDS स्पेशल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
15 लाख लोगों ने डाउनलोड किया ऐप
अमरेली पुलिस की SIT को जांच में पता चला कि SD Pay ऐप को करीब 15 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। इनमें से 6,52,831 बैंक खातों से करीब 1,211 करोड़ रुपये का निवेश बैंकिंग सिस्टम के जरिए किया गया। पुलिस का कहना है कि यह रकम केवल बैंक के जरिए हुए लेनदेन की है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने एजेंटों को नकद पैसे भी दिए थे।
कई मामलों में निवेशकों के पैसे जमा होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन उनके ऐप अकाउंट में क्रेडिट पॉइंट दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि किस व्यक्ति ने वास्तव में कितना पैसा लगाया और किसने इस नेटवर्क से कमीशन के रूप में कितनी कमाई की।
अब तक 876 पीड़ितों ने की शिकायत
पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत तक 573 पीड़ितों ने करीब 24.42 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायत की थी। 31 अक्टूबर तक शिकायत करने वालों की संख्या बढ़कर 876 हो गई। इन लोगों ने कुल 37.42 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी है। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर भी इस मामले से जुड़ी शिकायतों की संख्या बढ़ रही है।
पुलिस को छह कंपनियों के बैंक खातों के खिलाफ 831 शिकायतें मिली हैं। वहीं आरोपियों द्वारा चलाए जा रहे खातों के खिलाफ 15 शिकायतें दर्ज हैं। जांच में करीब 95 बड़े एजेंटों की पहचान की गई है। ये लोग गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में SD Pay का प्रचार कर रहे थे।
बनाई गई छह कंपनियां
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए सात कंपनियां बनाई थीं। पुलिस के मुताबिक, इन कंपनियों का कोई ऐसा कारोबार नहीं था, जिससे कमाई हो सके। न कोई प्रोडक्शन था, न बिक्री और न ही कोई वास्तविक सर्विस। पुलिस ने छह कंपनियों से जुड़े 38 बैंक खातों की पहचान की है। इसके अलावा इन कंपनियों के 16 डायरेक्टरों के नाम पर चल रहे 72 बैंक खातों का भी पता लगाया गया है। इन सभी खातों के जरिए पैसे का लेनदेन किया जा रहा था।
1.86 करोड़ रुपये ही जब्त कर पाई पुलिस
इस पूरे मामले में करीब 1,211 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन की जानकारी सामने आने के बावजूद पुलिस अब तक सिर्फ 1.86 करोड़ रुपये की रकम जब्त कर पाई है। पुलिस अब आरोपियों की जमीन, मकान और दूसरी संपत्तियों का पता लगा रही है, ताकि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त करके पीड़ितों का पैसा वापस दिलाने की कोशिश की जा सके। इसके लिए अदालत में भी आवेदन करने की तैयारी की जा रही है।
गुजरात के अलावा तीन राज्यों में भी दर्ज हैं मामले
SD Pay से जुड़े मामले सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक तीन राज्यों में आरोपियों के खिलाफ कम से कम 18 FIR दर्ज हुई हैं। इनमें गुजरात के 9 जिलों में 13 FIR, राजस्थान में 2, महाराष्ट्र में 2 और तमिलनाडु में 1 FIR शामिल है। वडोदरा पुलिस भी इस मामले में दो अलग-अलग केस की जांच कर रही है। इन मामलों में 10 पीड़ितों के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई है और तीन आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है। दाहोद में भी दो टीचर इस ऐप के जरिए ठगी का शिकार हुए हैं। इन दोनों का करीब 20 लाख और 21 लाख रुपये ऐप में फंसा हुआ है।
वहीं, गुजरात CID क्राइम ने सितंबर 2025 में ही SD Pay से जुड़े एक मामले की जांच शुरू कर दी थी। उस समय लोगों को अपना पैसा निकालने में परेशानी नहीं हो रही थी, इसलिए कोई खुलकर शिकायत करने के लिए तैयार नहीं था। CID के मुताबिक, बाद में जब RBI ने कुछ बैंक खातों को फ्रीज करना शुरू किया, तब लोग शिकायत लेकर सामने आने लगे।
पुलिस पर भी चलाया गया ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद देशभर से लोगों के फोन आने लगे। लोग बता रहे थे कि उन्होंने भी SD Pay में पैसा लगाया है और अब उनकी रकम फंसी हुई है। दूसरी तरफ, फरार आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया। वे पोस्ट डालकर दावा कर रहे थे कि कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया है और सभी निवेशकों का पैसा वापस कर दिया जाएगा।
कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि धवल पटेल ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया है और उसे जमानत भी मिल गई है। जबकि पुलिस के मुताबिक, ये सभी दावे गलत थे। इसके बाद पुलिस ने SD Pay ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटवाने की कार्रवाई की और RBI को भी पूरे मामले की जानकारी दी।
पहले ऐप से लोगों को जोड़ा अब न्याय की गुहार
वडोदरा की महिला टीचर के लिए यह पूरा मामला जिंदगी का सबसे बड़ा झटका बन गया। जिस ऐप को उन्होंने भरोसेमंद समझकर अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा दी थी, उसी ऐप के जरिए उनके परिवार और जानने वाले भी इस जाल में फंस गए। उन्होंने बताया कि जब उन्हें अपना पैसा वापस नहीं मिला तो वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई थीं। घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे। एक तरफ पढ़ाई कर रहा बेटा था तो दूसरी तरफ बुजुर्ग मां की जिम्मेदारी।
उन्होंने यहां तक बताया कि एक समय उनके मन में आत्महत्या करने का विचार भी आया था। लेकिन बाद में उन्होंने फैसला किया कि वह हार नहीं मानेंगी और कानूनी रास्ते से लड़ाई लड़ेंगी। 21 सितंबर को वह अमरेली पहुंचीं और आठ अन्य पीड़ितों के साथ पुलिस को 15 पन्नों की शिकायत दी।
महिला ने बताया कि उसी दिन जब पुलिस धवल पटेल, भावेश धनेचा और हिरन शाह को राजकोट कोर्ट ले जा रही थी, तब वह पुलिस की गाड़ी के पीछे दौड़ीं। गाड़ी रुकने पर वह धवल पटेल के पास पहुंचीं और उसे थप्पड़ मार दिया। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे और वह बार-बार उससे लोगों का पैसा लौटाने की मांग कर रही थीं। अब वह अपने पैसे के साथ-साथ उन सभी लोगों के लिए भी न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, जिन्हें उन्होंने भरोसा दिलाकर इस ऐप से जोड़ा था।
SD Pay मामले में गिरफ्तार 12 आरोपी
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार किए गए 12 लोगों के नाम हैं:
- अशिषभाई छगनभाई गेडिया (38) – SD Pay के प्रमोटर।
- भावेश धीरूभाई चौहान (41) – SD Pay के एजेंट।
- निरवकुमार अरविंदभाई पटेल (32) – कंपनी डायरेक्टर।
- निशि सत्यनारायण प्रसाद (47) – कंपनी डायरेक्टर।
- सोहिलभाई जितेंद्रकुमार मकवाना (26) – कंपनी डायरेक्टर।
- सूर्यसिंह जगतसिंह राठौड़ (24) – कंपनी डायरेक्टर।
- हिरन मुकेशभाई शाह (38) – SD Hub के एडमिन और Zoom मीटिंग होस्ट।
- धवल गोविंदभाई पटेल (39) – SD Pay का मालिक और मुख्य आरोपी।
- भावेशभाई अरविंदभाई धनेचा (53) – SD Pay के प्रमोटर।
- मुस्ताक अहमदशाह दीवान (47) – SD Pay के प्रमोटर।
- नारायण अशोक कांगणे (32) – कंपनी डायरेक्टर।
- संतोष कनैयालाल पाठक (54) – SD Pay के एजेंट और प्रमोटर।
कुल मिलाकर, SD Pay का मामला दिखाता है कि कैसे रोजाना मोटे ब्याज, रेफरल कमीशन और IPO में बड़े मुनाफे का सपना दिखाकर लाखों लोगों को निवेश के जाल में फंसाया गया। शुरुआत में मिलने वाले पैसों ने लोगों का भरोसा जीता, लेकिन जब नए निवेशकों से पैसा आना बंद हुआ तो पूरा सिस्टम ढह गया। अब हजारों पीड़ित अपने पैसे वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
