पेंशन पाते हैं तो घर बैठे बनाएं डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, जानिए पूरा प्रोसेस और इसके फायदे

जीवन प्रमाण ने पेंशनभोगियों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बना दिया है। खासकर बुजुर्ग, बीमार या अपने मूल स्थान से दूर रहने वाले पेंशनरों के लिए यह सेवा बड़ी राहत साबित हो रही है।

अगर आप केंद्र सरकार, राज्य सरकार, डिफेंस, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या किसी अन्य सरकारी संस्था के पेंशनभोगी हैं, तो जीवन प्रमाण (Jeevan Pramaan) आपके लिए बेहद उपयोगी डिजिटल सेवा है। भारत सरकार की यह पहल पेंशनरों को हर साल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कराने की झंझट से राहत देने के लिए शुरू की गई है। अब पेंशन जारी रखने के लिए बैंक या पेंशन वितरण कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तैयार हो जाता है, जिसे संबंधित पेंशन वितरण एजेंसी ऑनलाइन देख सकती है।

Life Certificate

डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट

डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट क्यों शुरू किया गया?

भारत में एक करोड़ से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनकी आय का प्रमुख स्रोत पेंशन है। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के लाखों पेंशनभोगी, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी और 25 लाख से अधिक रक्षा एवं सैन्य पेंशनभोगी शामिल हैं। पहले इन सभी को हर वर्ष अपनी जीवित होने की पुष्टि के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना पड़ता था। उम्र, बीमारी या दूसरे शहर में रहने के कारण यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए कठिन साबित होती थी। इसी समस्या का समाधान करने के लिए भारत सरकार ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट योजना (जीवन प्रमाण) शुरू की। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, सरल और पारदर्शी बनाना है ताकि पेंशनभोगियों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े।

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