अपना आशियाना खरीदना हर इंसान का एक बहुत बड़ा सपना होता है। घर खरीदने की प्रक्रिया में केवल कीमत, लोकेशन और सुविधाओं को देखना ही काफी नहीं होता है। खरीदारों को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि यदि कोई बिल्डर समय पर पजेशन देने में देरी करता है, नक्शे में बिना बताए बदलाव करता है या विज्ञापनों में झूठे दावे करता है, तो उनके पास कौन से कानूनी अधिकार और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। देश में रियल एस्टेट सेक्टर को विनियमित करने और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए 'रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016' यानी रेरा (RERA) कानून बनाया गया है, जो डेवलपर्स की जवाबदेही तय करता है।
घर खरीदारों के लिए ये जानना जरूरी है
यह कानून एडवांस पेमेंट से लेकर निर्माण पूरा होने के बाद आने वाली कमियों और भ्रामक विज्ञापनों तक कई तरह के मुद्दों को कवर करता है। हालांकि, मिलने वाली राहत इस बात पर निर्भर करती है कि मामला किस प्रावधान और राज्य के नियमों के अंतर्गत आता है। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले हर होमबायर को रेरा के इन पांच अधिकारों के बारे में जरूर पता होना चाहिए।
एग्रीमेंट के बिना 10 प्रतिशत से ज्यादा एडवांस नहीं ले सकता बिल्डर
रेरा की धारा 13 के तहत, कोई भी प्रमोटर या बिल्डर खरीदार से किसी अपार्टमेंट, प्लॉट या बिल्डिंग की कुल लागत का 10 प्रतिशत से अधिक पैसा बतौर एडवांस या एप्लीकेशन फीस तब तक नहीं ले सकता, जब तक कि वह खरीदार के साथ लिखित रूप में 'एग्रीमेंट फॉर सेल' (बिक्री अनुबंध) न कर ले और उसका रजिस्ट्रेशन न करा दे। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि खरीदार भारी-भरकम भुगतान करने से पहले लेनदेन की शर्तों से पूरी तरह वाकिफ हो सके। इस समझौते में विकास कार्य, भुगतान का शेड्यूल और पजेशन की तारीख जैसी तमाम बातें स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।
पजेशन में देरी होने पर रिफंड या ब्याज पाने का हक
रेरा की धारा 18 उन स्थितियों में राहत देती है जब प्रमोटर तय समझौते के अनुसार प्रोजेक्ट को पूरा करने या समय पर पजेशन देने में असफल रहता है। यदि कोई खरीदार इस देरी के कारण प्रोजेक्ट से बाहर निकलना (withdraw करना) चाहता है, तो प्रमोटर को अधिनियम के तहत तय ब्याज और मुआवजे के साथ पूरी राशि लौटानी होगी। वहीं, यदि खरीदार प्रोजेक्ट में ही बने रहने का फैसला करता है, तो बिल्डर को पजेशन मिलने तक हर महीने की देरी के लिए ब्याज देना होगा।
आपकी सहमति के बिना फ्लैट में बदलाव नहीं कर सकता बिल्डर
रेरा की धारा 14 प्रमोटर को खरीदार की पूर्व अनुमति के बिना किसी व्यक्तिगत अपार्टमेंट में कोई भी बड़ा बदलाव या फेरबदल करने से रोकती है (हालांकि छोटे-मोटे बदलावों की अनुमति होती है)। इसके अलावा, यह कानून बिल्डिंग या कॉमन एरिया के स्वीकृत नक्शे और लेआउट में बदलाव को भी नियंत्रित करता है। ऐसे किसी भी बदलाव के लिए कम से कम दो-तिहाई आवंटियों (allottees) की लिखित सहमति लेना अनिवार्य होता है। यह अधिकार तब बेहद काम आता है जब बुकिंग के बाद बिल्डर लेआउट या सुविधाओं में बदलाव करने की कोशिश करता है।
कब्जा मिलने के 5 साल तक निर्माण में कमी सुधारने की मांग
रेरा की धारा 14(3) के अनुसार, यदि कोई खरीदार पजेशन मिलने के 5 साल के भीतर किसी स्ट्रक्चरल डिफेक्ट या कारीगरी, गुणवत्ता और सेवाओं में कमी की शिकायत करता है, तो प्रमोटर की जिम्मेदारी है कि वह उसे 30 दिनों के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ठीक करे। यदि प्रमोटर ऐसा करने में विफल रहता है, तो खरीदार अधिनियम के तहत उचित मुआवजे का हकदार बन जाता है। यह प्रावधान निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में खरीदार को मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है।
झूठे विज्ञापनों और वादों के खिलाफ कानूनी उपाय
रेरा की धारा 12 उन विज्ञापनों, नोटिसों या मॉडल अपार्टमेंट्स से जुड़े नुकसान को कवर करती है जिनमें गलत या झूठे दावे किए जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसे विज्ञापनों या बयानों के आधार पर एडवांस पैसा जमा करता है और उसे नुकसान उठाना पड़ता है, तो यह धारा उसे सुरक्षा देती है। यदि प्रभावित खरीदार प्रोजेक्ट से हटना चाहता है, तो प्रमोटर पर ब्याज और मुआवजे के साथ निवेश की पूरी राशि लौटाने की कानूनी जिम्मेदारी होती है।
रेरा कानून डेवलपर्स की मनमानी और अनुचित प्रथाओं के खिलाफ खरीदारों को एक मजबूत ढाल प्रदान करता है। एडवांस पेमेंट पर रोक से लेकर पजेशन में देरी, नक्शे में unauthorized बदलाव, निर्माण की कमियों और झूठे विज्ञापनों के खिलाफ इसमें स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, किसी भी विवाद की स्थिति में मिलने वाली राहत राज्य के नियमों और एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करती है।
