घर खरीदने जा रहे हैं? बिल्डर की लेट-लतीफी और धोखाधड़ी से बचाएंगे ये अहम RERA अधिकार

RERA कानून घर खरीदारों को 10% से अधिक एडवांस पर रोक, पजेशन में देरी पर ब्याज या रिफंड, बिना इजाजत बदलाव न करने, 5 साल तक निर्माण दोष सुधारने और झूठे विज्ञापनों पर राहत देता है।

अपना आशियाना खरीदना हर इंसान का एक बहुत बड़ा सपना होता है। घर खरीदने की प्रक्रिया में केवल कीमत, लोकेशन और सुविधाओं को देखना ही काफी नहीं होता है। खरीदारों को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि यदि कोई बिल्डर समय पर पजेशन देने में देरी करता है, नक्शे में बिना बताए बदलाव करता है या विज्ञापनों में झूठे दावे करता है, तो उनके पास कौन से कानूनी अधिकार और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। देश में रियल एस्टेट सेक्टर को विनियमित करने और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए 'रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016' यानी रेरा (RERA) कानून बनाया गया है, जो डेवलपर्स की जवाबदेही तय करता है।

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घर खरीदारों के लिए ये जानना जरूरी है

यह कानून एडवांस पेमेंट से लेकर निर्माण पूरा होने के बाद आने वाली कमियों और भ्रामक विज्ञापनों तक कई तरह के मुद्दों को कवर करता है। हालांकि, मिलने वाली राहत इस बात पर निर्भर करती है कि मामला किस प्रावधान और राज्य के नियमों के अंतर्गत आता है। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले हर होमबायर को रेरा के इन पांच अधिकारों के बारे में जरूर पता होना चाहिए।

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