Benefits Of Slow Travel: स्लो ट्रैवल ट्रेंड पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। स्लो ट्रैवल का मतलब रफ्तार भरी जिंदगी को आराम देने से और धीरे-धीरे घूमने से है। एक जगह पर ठहरना, उसकी आत्मा को महसूस करना सीधे शब्दों में समझें तो यात्रा को पूरी तरह जीना स्लो ट्रैवल की पहचान है। स्लो ट्रैवल में स्थानीय लोगों से जुड़ाव और मानसिक शांति पर पर्यटकों का फोकस रहता है।
Slow travel trend
स्लो ट्रैवल कैसे करें: किसी जगह पर 2-3 दिन रुकने की बजाय 7-10 दिन तक की ट्रिप का प्लान करें। होटल की बजाय होमस्टे या गेस्टहाउस में ठहरें, लोकल फूड ट्राय करें, मोबाइल से दूरी बनाएं और डिजिटल डिटॉक्स का आनंद लें। ट्रैवल डायरी लिखना भी इसका हिस्सा हो सकता है। सोलो ट्रिप करना भी इसका हिस्सा होता है।
भारत में स्लो ट्रैवल के लिए जगहें: ज्यादा दूर ना जाकर आप भारत से ही यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं। हम्पी (कर्नाटक), स्पीति वैली, हिमाचल प्रदेश, पुदुचेरी, जैसलमेर के गांव कुछ ऐसी लोकेशन हैं जिन्हें आप अपनी बकेट लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
स्लो ट्रैवल क्यों जरूरी है: गहराई से अनुभव करने का मौका, कम थकान ज्यादा सुकून और इको-फ्रेंडली अप्रोच के लिए स्लो ट्रैवल बेहद जरूरी है। पर्यावरण के लिए तो ये बेहतर होता ही साथ ही आप स्लो ट्रैवल के माध्यम से लोकल मार्केट और छोटे रेस्टोरेंट्स को भी सपोर्ट करते हैं जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होता है।
