Kalpa Travel Guide: रोज की भागदौड़ से दूर किसी ऐसी जगह जाने का मन हो, जहां न ऑफिस की टेंशन हो, न गाड़ियों के हॉर्न और न ही हर वक्त मोबाइल पर आने वाले नोटिफिकेशन की चिंता, तो हिमाचल प्रदेश का कल्पा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कुछ अलग देखने और घूमने की चाह में इस बार मैं किन्नौर जिले में बसे इस खूबसूरत पहाड़ी गांव पहुंचा। यहां आकर एहसास हुआ कि पहाड़ों की खूबसूरती सिर्फ ऊंची चोटियों तक सीमित नहीं है। यहां गांव की छोटी-छोटी गलियां, ठंडी हवा, सेब के बगीचे और सामने नजर आती बर्फ से ढकी पहाड़ियां भी सफर को खास बना देती हैं।
पहाड़ों में एक सुकून भरा सफर
दिल्ली से कल्पा का सफर: लंबा जरूर, लेकिन मजेदार
समुद्र तल से करीब 2,960 मीटर की ऊंचाई पर बसा कल्पा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है। दिल्ली से यहां पहुंचने में अच्छा-खासा समय लगता है, इसलिए अगर आप वीकेंड में घूमने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा हिसाब लगाकर चलें। सड़क मार्ग से दूरी रूट के हिसाब से लगभग 550 से 600 किलोमीटर हो सकती है और सफर में करीब 14 से 17 घंटे या उससे ज्यादा भी लग सकते हैं।
मैंने दिल्ली से शिमला के लिए बस ली और फिर नारकंडा, रामपुर और रिकांग पिओ होते हुए कल्पा पहुंचा। रास्ते में पहाड़ों का नजारा बदलता रहता है। कहीं घुमावदार सड़कें हैं, कहीं गहरी घाटियां और कहीं सतलुज नदी आपका साथ देती नजर आती है।
हालांकि, एक बात साफ है कि यह कोई ऐसा सफर नहीं है जिसमें आप बस में बैठे-बैठे दो-चार झपकी लें और तुरंत मंजिल पर पहुंच जाएं। लंबी यात्रा की वजह से थकान होना लाजिमी है। इसलिए बीच में आराम करने और खाने-पीने के लिए समय जरूर रखें। लेकिन जैसे-जैसे आप किन्नौर की तरफ बढ़ते हैं, आसपास के नजारे सफर की थकान कुछ हद तक भुला देते हैं।
बादलों के बीच खूबसूरत गांव
कल्पा पहुंचकर सबसे पहले क्या करें?
कल्पा की सबसे अच्छी बात यह लगी कि यहां पहुंचते ही बड़े पर्यटन स्थलों जैसा शोर-शराबा महसूस नहीं होता। यहां की रफ्तार थोड़ी धीमी है और शायद यही इस जगह की सबसे बड़ी खूबी है। यहां पहुंचकर सबसे पहले आसपास के पहाड़ों को निहारें और गांव में आराम से टहलें।
कल्पा से किन्नौर कैलाश पर्वत श्रृंखला का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। मौसम साफ हो तो पहाड़ों की चोटियां देखने का अलग ही मजा है। कई बार आप बस किसी एक जगह बैठकर सामने देखते रहें, तब भी वक्त बिताने के लिए किसी दूसरी एक्टिविटी की जरूरत नहीं पड़ती।
यहां की गलियों में घूमते हुए स्थानीय घरों की बनावट, लकड़ी की नक्काशी और पहाड़ी जीवन की झलक देखने को मिलती है। अगर आपको फोटोग्राफी या वीडियो बनाने का शौक है, तो यहां काफी अच्छे फ्रेम मिल सकते हैं। मैंने भी यहां के नजारों को अपने कैमरे में कैद करने का मौका नहीं छोड़ा।
दिल्ली से कल्पा का सफर
कल्पा में घूमने की ये जगहें जरूर देखें
1. किन्नौर कैलाश व्यू पॉइंट: कल्पा आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक यहां से दिखने वाला किन्नौर कैलाश का नजारा है। साफ मौसम में पहाड़ों की खूबसूरती देखते ही बनती है।
2. नारायण-नागिनी मंदिर: अगर आपको स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला में दिलचस्पी है, तो इस मंदिर को देख सकते हैं। यहां किन्नौर की धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय शैली की झलक मिलती है।
3. कल्पा बौद्ध मठ: पहाड़ों के बीच स्थित यह जगह शांत माहौल में कुछ समय बिताने के लिए अच्छी है। यहां जाकर आसपास के नजारों का आनंद भी लिया जा सकता है।
4. रोगी गांव: कल्पा के आसपास बसे गांवों को करीब से देखना चाहते हैं, तो रोगी गांव जा सकते हैं। यहां पहाड़ी जीवन, स्थानीय घर और आसपास के नजारे देखने को मिलते हैं।
5. सुसाइड पॉइंट: यह जगह अपनी ऊंची ढलानों और गहरी घाटी के नजारों के लिए जानी जाती है। यहां फोटो लेते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किनारों के पास जाने से बचें।
हिमाचल का छिपा खजाना
कल्पा में ट्रेकिंग का भी है अपना मजा
अगर आप सिर्फ होटल में बैठकर पहाड़ देखने के बजाय थोड़ा घूमना-फिरना चाहते हैं, तो कल्पा के आसपास हाइकिंग और ट्रेकिंग के विकल्प भी मिलते हैं। चाका मेदोज ट्रेक उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जिन्हें पहाड़ों में पैदल चलना पसंद है। आने-जाने में लगभग 5 से 6 घंटे लग सकते हैं, हालांकि समय आपकी गति, मौसम और रास्ते की स्थिति पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा काशांग घाटी की तरफ हाइकिंग और रोगी गांव के आसपास पैदल घूमने के विकल्प भी देख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि हर रास्ता आसान नहीं होता। निकलने से पहले स्थानीय लोगों या गाइड से रास्ते की स्थिति जरूर पता कर लें। मौसम खराब हो या रास्ता सुरक्षित न लगे, तो ट्रेकिंग का प्लान टाल देना ही बेहतर है।
दिल्ली से कल्पा का सफर
कल्पा में कहां ठहरें? बजट के हिसाब से चुनें होटल
कल्पा में रुकने के लिए होटल, गेस्टहाउस और होमस्टे जैसे कई विकल्प मिल जाते हैं। अगर आप बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो होमस्टे अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां आपको स्थानीय लोगों के रहन-सहन और खानपान को करीब से समझने का मौका भी मिलता है। वहीं, अगर आपको आरामदायक कमरा, बेहतर सुविधाएं और रूम सर्विस चाहिए, तो होटल चुन सकते हैं। मेरी सलाह है कि ठहरने की जगह बुक करते समय यह जरूर देख लें कि वहां से पहाड़ों का नजारा मिलता है या नहीं। हालांकि, केवल व्यू के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है। कई बार साधारण होमस्टे में भी सुबह खिड़की से दिखने वाला नजारा आपका दिन बना देता है।
