आज के समय में इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। मोबाइल पर वीडियो देखना हो, ऑनलाइन पढ़ाई करनी हो, किसी से वीडियो कॉल पर बात करनी हो या फिर घर बैठे काम करना हो, इन सभी कामों के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे मोबाइल में इंटरनेट आखिर आता कहां से है? आमतौर पर हम मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब सैटेलाइट इंटरनेट की भी काफी चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि सैटेलाइट इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क में क्या अंतर है और दोनों में से कौन बेहतर है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
सैटेलाइट इंटरनेट का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसके लिए आपके आसपास मोबाइल टावर होना जरूरी नहीं है।
सैटेलाइट इंटरनेट क्या होता है?
सैटेलाइट इंटरनेट एक ऐसी तकनीक है, जिसमें इंटरनेट देने के लिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट यानी उपग्रहों की मदद ली जाती है। आसान शब्दों में समझें तो आपका इंटरनेट कनेक्शन सीधे या किसी खास डिश और डिवाइस के जरिए आसमान में मौजूद सैटेलाइट से जुड़ता है। इसके बाद सैटेलाइट के जरिए डेटा आपके डिवाइस तक पहुंचता है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहां मोबाइल टावर लगाना मुश्किल होता है, वहां भी इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है। जैसे पहाड़ी इलाके, दूर-दराज के गांव, जंगल या समुद्र के बीच मौजूद जगहें। ऐसी जगहों पर सैटेलाइट इंटरनेट काफी काम आ सकता है। Starlink जैसी सेवाएं इसी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं।
मोबाइल नेटवर्क क्या होता है?
मोबाइल नेटवर्क वह नेटवर्क है, जिसके जरिए हम अपने मोबाइल फोन में कॉलिंग और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। जब आप अपने फोन में 4G या 5G इंटरनेट चलाते हैं, तो आपका मोबाइल आसपास लगे मोबाइल टावर से जुड़ता है। ये टावर आगे कंपनी के नेटवर्क और इंटरनेट सिस्टम से जुड़े होते हैं, जिनकी मदद से आपके फोन तक डेटा पहुंचता है।
उदाहरण के लिए, जब आप YouTube पर कोई वीडियो चलाते हैं या WhatsApp पर मैसेज भेजते हैं, तो आपका मोबाइल मोबाइल टावर की मदद से इंटरनेट से जुड़ता है। आज भारत में Jio, Airtel और Vi जैसी कंपनियां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा देती हैं। इस नेटवर्क का इस्तेमाल शहरों से लेकर गांवों तक बड़ी संख्या में लोग करते हैं।
सैटेलाइट इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क कैसे काम करते हैं?
दोनों का काम आपको इंटरनेट देना है, लेकिन इंटरनेट पहुंचाने का तरीका अलग-अलग है। मोबाइल नेटवर्क में आपका फोन आसपास के मोबाइल टावर से सिग्नल लेता है। इसके बाद टावर और कंपनी के नेटवर्क के जरिए आपका फोन इंटरनेट से जुड़ जाता है।
वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट में डेटा को अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट तक भेजा जाता है और वहां से वापस धरती पर मौजूद नेटवर्क स्टेशन या इंटरनेट डिवाइस तक पहुंचाया जाता है। कुछ सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में घर पर एक खास डिश या टर्मिनल लगाया जाता है, जो सैटेलाइट से सिग्नल पकड़ता है। इस तरह बिना आसपास मोबाइल टावर पर निर्भर हुए भी इंटरनेट चलाया जा सकता है।
दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
सैटेलाइट इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के बीच सबसे बड़ा अंतर इंटरनेट पहुंचाने के तरीके और उनकी उपलब्धता का है। मोबाइल नेटवर्क के लिए मोबाइल टावर और नेटवर्क की अच्छी कवरेज जरूरी होती है। अगर किसी जगह मोबाइल टावर का सिग्नल कमजोर है, तो इंटरनेट भी ठीक से नहीं चलेगा। इसके उलट, सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा बहुत कम है या बिल्कुल नहीं है। हालांकि, इसके लिए सैटेलाइट इंटरनेट की सेवा उपलब्ध होना, सही उपकरण होना और आसमान की ओर पर्याप्त खुला रास्ता मिलना जरूरी हो सकता है।
इंटरनेट की स्पीड किसमें ज्यादा होती है?
इंटरनेट की स्पीड की बात करें, तो यह कहना सही नहीं होगा कि सैटेलाइट इंटरनेट हमेशा तेज होता है या मोबाइल नेटवर्क हमेशा धीमा होता है। दोनों की स्पीड कई बातों पर निर्भर करती है। अगर आपके इलाके में 4G या 5G नेटवर्क अच्छा है, तो मोबाइल इंटरनेट काफी तेज चल सकता है। वहीं, अच्छी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी वीडियो देखने, ऑनलाइन मीटिंग करने और दूसरे इंटरनेट वाले कामों के लिए अच्छी स्पीड दे सकती है। लेकिन मौसम, नेटवर्क पर यूजर्स की संख्या, सिग्नल की स्थिति और इस्तेमाल की जा रही तकनीक से स्पीड में फर्क पड़ सकता है। इसलिए इंटरनेट की स्पीड के मामले में किसी एक को हर जगह बेहतर कहना सही नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कहां रहते हैं और वहां कौन-सी सेवा अच्छी है।
किसमें इंटरनेट का खर्च ज्यादा होता है?
खर्च के मामले में भी दोनों के बीच अंतर हो सकता है। मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए आमतौर पर आपको सिम कार्ड और रिचार्ज प्लान की जरूरत होती है। भारत में मोबाइल इंटरनेट के कई तरह के प्लान उपलब्ध हैं, इसलिए सामान्य इस्तेमाल के लिए यह लोगों के बजट में आसानी से आ सकता है। दूसरी तरफ, सैटेलाइट इंटरनेट में कई सेवाओं के लिए खास डिश या टर्मिनल खरीदना पड़ सकता है। इसके अलावा हर महीने का सब्सक्रिप्शन चार्ज भी देना पड़ सकता है। इस वजह से शुरुआती खर्च ज्यादा हो सकता है। हालांकि, इसकी कीमत कंपनी, प्लान और देश के हिसाब से अलग-अलग होती है।
