एक समय था जब भारत में 1GB मोबाइल डेटा के लिए 268 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे, लेकिन आज इसकी कीमत घटकर महज 8 रुपये रह गई है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में यह जानकारी देते हुए देश के टेलीकॉम सेक्टर में आए बड़े बदलावों को सामने रखा। उनके मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में डेटा की कीमत में करीब 97 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी ओर, इंटरनेट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है और अब एक औसत भारतीय हर महीने 36GB से ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहा है।
268 रुपये से 8 रुपये तक कैसे पहुंचा डेटा?Photo- x.com/JM_Scindia
नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस साल कार्यक्रम की थीम 'Scale Without Boundaries' यानी बिना सीमाओं के विस्तार रखी गई है। सरकार का जोर भारत को डिजिटल टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी के संचार नेटवर्क के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने पर है।
268 रुपये से 8 रुपये तक कैसे पहुंचा डेटा?
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि साल 2014 में भारत में 1GB मोबाइल डेटा की कीमत करीब 268 रुपये थी। अब यही डेटा लगभग 8 रुपये में मिल रहा है। यानी इंटरनेट इस्तेमाल करने की लागत में भारी कमी आई है। सस्ते डेटा ने आम लोगों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, वीडियो स्ट्रीमिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल आसान बनाया है।
सिंधिया के मुताबिक, करीब एक दशक पहले भारत में एक व्यक्ति हर महीने औसतन 0.26GB डेटा इस्तेमाल करता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 36GB से अधिक हो गया है। इससे पता चलता है कि कम कीमत और बेहतर कनेक्टिविटी ने लोगों की इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतों को कितना बदल दिया है।
135 करोड़ से ज्यादा टेलीकॉम ग्राहक
संचार मंत्री ने बताया कि भारत में अब 1.35 अरब से अधिक टेलीकॉम सब्सक्राइबर और 1.09 अरब से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। उनके अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान भी टेलीकॉम नेटवर्क ने देश को जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। ऑनलाइन क्लास, स्वास्थ्य सेवाओं और कारोबार को जारी रखने में इंटरनेट मददगार साबित हुआ।
भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है। अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 5G सेवा शुरू किए जाने के बाद देश के 99.9 फीसदी जिलों तक इसका विस्तार हो चुका है। सिंधिया के मुताबिक, 5G का इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 55 करोड़ पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 करोड़ 5G यूजर्स तक पहुंचना है।
AI और 6G जैसी तकनीकों पर रहेगा जोर
IMC 2026 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी, AI आधारित प्री-6G नेटवर्क, सुरक्षित क्लाउड, टेराहर्ट्ज कम्युनिकेशन और इंटीग्रेटेड सेंसिंग जैसी उभरती तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। सरकार का मकसद इन तकनीकों को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। इस आयोजन में 100 से ज्यादा देशों की भागीदारी है। दूरसंचार विभाग के अनुमान के मुताबिक, इसमें 1.5 लाख से अधिक लोगों, 500 से ज्यादा प्रदर्शकों और भागीदारों तथा 600 से ज्यादा स्टार्टअप के शामिल होने की उम्मीद है।
गांवों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाने पर फोकस
दूरसंचार विभाग के पवेलियन में 'समृद्ध ग्राम' थीम के तहत ग्रामीण इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल को प्रदर्शित किया गया है। यहां संचार साथी, फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) और दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र की पहलों को भी जगह दी गई है।
सरकार का जोर केवल इंटरनेट सस्ता करने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित बनाना और गांवों तक पहुंचाना भी प्राथमिकता है। सस्ते डेटा, 5G नेटवर्क और नई तकनीकों के विस्तार के साथ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने की तैयारी है।
