आपका पुराना स्मार्टफोन सिर्फ कबाड़ नहीं है। जिस फोन को आप खराब होने के बाद दराज में रख देते हैं या बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसके अंदर सोना, तांबा, क्वार्ट्ज और बॉक्साइट जैसे कई उपयोगी खनिजों से बने हिस्से मौजूद होते हैं। इन संसाधनों को सही तरीके से रिसाइकिल करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अगर पुराना फोन गलत तरीके से फेंक दिया जाए, तो इन कीमती संसाधनों के बर्बाद होने का खतरा रहता है।
आपके फोन में कहां छिपे हैं कीमती खनिज?
आपके फोन में कहां छिपे हैं कीमती खनिज?
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट के जरिए इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही निपटान का संदेश दिया है। इसमें बताया गया है कि स्मार्टफोन के अलग-अलग हिस्सों को बनाने में प्राकृतिक खनिजों और धातुओं का इस्तेमाल होता है।
फोन की चिप में क्वार्ट्ज से मिलने वाले सिलिकॉन की अहम भूमिका होती है। इसकी वायरिंग में तांबे का इस्तेमाल किया जाता है। फोन के कनेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के कुछ हिस्सों में सोना भी मौजूद होता है, जबकि बॉक्साइट से बनने वाला एल्युमिनियम फोन की बॉडी और दूसरे हिस्सों में इस्तेमाल हो सकता है। यानी आपके हाथ में मौजूद मोबाइल के पीछे धरती से निकाले गए कई महत्वपूर्ण संसाधनों की भूमिका है।
पुराना फोन फेंकने से क्या नुकसान होता है?
जब स्मार्टफोन, चार्जर या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कूड़े में फेंक दिया जाता है, तो उनमें मौजूद उपयोगी धातुओं को दोबारा हासिल करना मुश्किल हो सकता है। गलत तरीके से ई-कचरे का निपटान पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
वहीं, अधिकृत ई-वेस्ट रिसाइक्लर के जरिए पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रिसाइकिल कराने पर उनमें मौजूद उपयोगी सामग्री को निकालकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नए खनिजों के खनन पर निर्भरता घटाने और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने में मदद मिलती है।
पुराने गैजेट का क्या करें?
विशेष अभियान 6.0 के तहत लोगों से अपील की गई है कि वे अपने पुराने मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को अधिकृत ई-वेस्ट रिसाइक्लर तक पहुंचाएं। इन्हें खुले में या सामान्य कूड़े के साथ फेंकने से बचें। फोन देने से पहले अपना जरूरी डेटा सुरक्षित कर लें और निजी जानकारी हटा दें। अगली बार पुराना फोन बेकार समझकर फेंकने से पहले याद रखें, उसमें छिपे संसाधन दोबारा काम आ सकते हैं। सही रिसाइक्लिंग से न सिर्फ कीमती खनिज बचेंगे, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी मदद मिलेगी।
