केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए जा रहे ‘डीपफेक’ कंटेंट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने फर्जी वीडियो और तस्वीरों को हटाने की अपनी कार्रवाई को पहले के मुकाबले लगभग दो से तीन गुना तक बढ़ा दिया है। यह कदम तेजी से बढ़ते डिजिटल खतरे से निपटने के लिए उठाया गया है।
डीपफेक पर सख्ती तेज: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने कार्रवाई 2-3 गुना बढ़ाई: अश्विनी वैष्णव
क्या है डीपफेक और क्यों है खतरनाक?
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है, जिसमें किसी व्यक्ति की फोटो, आवाज या वीडियो को डिजिटल रूप से बदलकर बिल्कुल असली जैसा दिखने वाला नकली कंटेंट तैयार किया जाता है। AI के तेजी से विकास के कारण इस तरह की सामग्री बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर डीपफेक कंटेंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो आम लोगों के लिए पहचानना मुश्किल होता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बढ़ाई निगरानी
PTI/भाषा के मुताबिक अश्विनी वैष्णव ने कहा, दुनिया भर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए फर्जी कंटेंट को हटाने के लिए अपनी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीपफेक सामग्री को हटाने की प्रक्रिया को दोगुना से तिगुना तक बढ़ाया गया है, ताकि गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके।
समाज के लिए बड़ा खतरा
अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक को समाज के लिए एक नया खतरा और अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि संस्थानों और पूरे समाज के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है। फर्जी वीडियो और ऑडियो के जरिए गलत सूचनाएं फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे भ्रम और अविश्वास पैदा होता है।
मिलकर करना होगा मुकाबला
मंत्री ने जोर देकर कहा कि डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए हर व्यक्ति, संस्थान और टेक कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता ही इस खतरे से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
