नई दिल्ली: हॉकी इंडिया लीग को बचाने की कवायद में सभी संबंधित पक्षों से मुलाकात के एक महीने के भीतर खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया, फ्रेंचाइजी और मंत्रालय के प्रतिनिधियों को शामिल करके सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। मंत्रालय के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा,'समिति में खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव (खेलो इंडिया) विनील कृष्णा, हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की, महासचिव भोलानाथ सिंह और कोषाध्यक्ष शेखर मनोहरन शामिल होंगे।'
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया (फोटो क्रेडिट AI Generated/News Room Verified)
आलोक सांघी, महेश भूपति और दिव्यांशु सिंह हैं समिति का हिस्सा
सूत्र ने आगे बताया, 'हॉकी इंडिया लीग फ्रेंचाइजी की ओर से आलोक सांघी, महेश भूपति और दिव्यांशु सिंह समिति का हिस्सा हैं।' खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने 14 सितंबर को हॉकी इंडिया अधिकारियों और फ्रेंचाइजी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी जिन्हें लीग पर आये संकट के बारे में बताया गया था। खेलमंत्री ने सभी हितधारकों से लीग के प्रशासन मॉडल, वित्तीय मॉडल और ढांचे पर काम करने के लिये कहा था। इसके साथ ही इस पर काम करने के लिये हॉकी इंडिया, फ्रेंचाइजी और खेल मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी को लेकर पैनल के गठन के लिये भी कहा गया था । यह समिति मंत्रालय को तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट देगी। समिति के गठन से सभी संबंधित पक्ष मिलकर लीग के सुचारू संचालन का मार्ग प्रशस्त करने के लिये काम करेंगे और सरकार का इस प्रक्रिया में सीधा प्रतिनिधित्व रहेगा।
महिला खिलाड़ियों ने की थी हॉकी लीग को बचाने की अपील
अगस्त में नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए विश्व कप में ऐतिहासिक पांचवें स्थान पर रहने के बाद भारतीय महिला हॉकी कप्तान सलीमा टेटे और अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया समेत महिला हॉकी खिलाड़ियों ने लीग को बचाने की भावुक अपील की थी। हॉकी इंडिया लीग के अगले सत्र पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं और फ्रेंचाइजी ने इसके प्रशासन और वित्तीय ढांचे पर अधिक स्पष्टता की मांग की है।
लीग सात साल बंद रहने के बाद 2024 में फिर शुरू की गई थी और भारतीय खिलाड़ियों के लिये काफी फायदेमंद साबित हुई है। खासकर महिला टीम के प्रदर्शन में आये सुधार में लीग की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन बढ़ती लागत और कुछ फ्रेंचाइजी के पीछे हटने के कारण इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है।
हॉकी इंडिया में चल रहा है सत्ता संघर्ष
हॉकी इंडिया में चल रहे सत्ता के संघर्ष के बीच यह कदम और भी महत्वपूर्ण है। हॉकी इंडिया अध्यक्ष टिर्की और महासचिव भोलानाथ के बीच पिछले कुछ समय से कई प्रशासनिक मसलों को लेकर मतभेद सार्वजनिक तौर पर सामने आये हैं जिनमें विश्व कप से ठीक पहले का जर्सी विवाद शामिल है।
(भाषा)
